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अनिल अंबानी पर छाया घने आर्थिक संकटों के बादल

अनिल अम्बानी के साथ कंपनी के कई डायरेक्टरों ने दिया इस्तीफा

भारत में मोबाइल क्रांति लाने वाले रिलायंस कम्युनिकेशंस ( RCom ) के चेयरमैन अनिल अंबानी साल 2008 दुनिया के छठवें सबसे अमीर शख्स थे और उनकी संपत्ति 42 अरब डॉलर की संपत्ति थी| लेकिन अब हालात ऐसी हो गई है कि शनिवार को उन्हें रिलायंस कम्युनिकेशंस के निदेशक पद से इस्तीफा देना पड़ा| इसके साथ ही अनिल अंबानी अरबपतियों के क्लब से भी बाहर हो गए हैं| 

दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही कंपनी 

मौजूदा समय में रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही है| शुक्रवार को जारी तिमाही नतीजों के अनुसार कंपनी को 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ था| यह कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के 50 हज़ार करोड़ के नुकसान के बाद दूसरा सबसे बड़ा घाटा है| कर्ज चुकाने के लिए कंपनी अपनी और संपत्तियों को भी बेच रही है| 

लगातार आ रहे हैं इस्तीफे

अनिल अंबानी के अलावा छाया विरानी, रायना कारानी, मंजरी काकेर और सुरेश रंगाचर ने भी इस्तीफा दे दिया है| इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने 15 नवंबर को इस्तीफा दिया| वहीं रायना कारानी ने 14 नवंबर और सुरेश रंगाचर ने 13 नवंबर को इस्तीफा दिया था|  

लगातार घटती रही है संपत्ति 

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2008 में अनिल अंबानी के पास 42 अरब डॉलर की संपत्ति थी, जो 11 साल बाद यानी 2019 में घटकर 5230 मिलियन डॉलर यानी करीब 3651 करोड़ रुपए हो गई है| ज्ञात हो कि इस संपत्ति में गिरवी वाले शेयरों की कीमत भी शामिल हैं। 

रिलायंस ग्रुप पर कुल 1.7 लाख करोड़ रुपए  का कर्ज 

मार्च 2018 में रिलायंस ग्रुप का कुल कर्ज 1.7 लाख करोड़ रुपए था|  जिसमें से 31 मार्च 2019 तक आरकॉम पर करीब 35,600 करोड़ रुपए का कर्ज था|  

रिलायंस पावर पर 30,200 करोड़ रुपए, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 17,800 करोड़ रुपए, रिलायंस कैपिटल पर 38,900 करोड़ रुपए और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग पर मार्च 2019 तक 7,000 करोड़ रुपए का कर्ज था| 

गौरतलब है की RCom की कुल देनदारियों में 23,327 करोड़ रुपए का लाइसेंस शुल्क और 4,987 करोड़ रुपए का स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्क भी शामिल है|  आरकॉम और उसकी अनुषंगियों ने 1,210 करोड़ रुपए के ब्याज और 458 करोड़ रुपए के विदेशी विनिमय उतार-चढ़ाव के लिए प्रावधान नहीं किया है| 

मुनाफे वाली कंपनी मिलने के बावजूद हुआ घाटा

साल 2005 में जब धीरूभाई अंबानी के 28,000 करोड़ रुपए के रिलायंस ग्रुप का बंटवारा हुआ था, तब मुनाफा कमाने वाला टेलिकॉम सेक्टर अनिल अंबानी को मिला था| साथ ही यह निर्णय लिया गया था कि आगामी 10 वर्षों तक बड़े भाई मुकेश इस क्षेत्र में दखल नहीं देंगे| लेकिन तब भी कंपनी को घाटा होता चला गया|  

CDMA टेक्नोलॉजी थी अनिल अंबानी की गलती

विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2002 में रिलायंस इन्फोकॉम की शुरुआत हुई थी|  तब अनिल अंबानी ने CDMA टेक्नोलॉजी को चुना था| इस टेक्नोलॉजी की एक बड़ी समस्या थी कि यह केवल 2G और 3G को सपोर्ट करती है| उस समय इसने खूब जोर पकड़ा या यूं कहें की प्रारंभिक मोबाइल क्रांति लाने में अनिल अंबानी का बहुत बड़ा योगदान था| लेकिन फिर भारत में तब 4G की शुरुआत होने को आई, और इसलिए बड़े-बड़े निवेश और ऑफरों के बाद भी RCom तकनीक में पिछड़ता चला गया| अन्य टेलिकॉम कंपनियों ने GSM टेक्नोलॉजी को चुना था|  

मनोरंजन क्षेत्र में भी हुआ घाटा

इसके अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर और मनोरंजन में भी उनको फायदा नहीं हुआ|  साल 2014 में उनकी पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां बड़े कर्ज में डूब गईं|  कर्ज का भुगतान करने के लिए उनके पास केवल कंपनियों को बेचने का ही विकल्प बचा था|  उन्होंने कंपनियों को बेचने की शुरुआत की पर बात नहीं बनी| अनिल अंबानी ने एक साथ बड़ा विस्तार किया था और उनकी मुख्य कंपनियां भी उसी दौर में घाटे में आ गईं, जिसकी वजह से वे मुसीबतों से घिर गए| 2005 में ऐडलैब्स और 2008 में उन्होंने 1.2 अरब डॉलर का करार ड्रीमवर्क्स के साथ किया था| 

जियो के आने से हुआ और भी नुकसान

एक ओर अनिल अंबानी की कंपनियां घाटे में चल रही थी, वहीं दूसरी ओर उनके भाई मुकेश अंबानी के साथ 10 साल के करार के अंत का समय आया और मुकेश अंबानी ने टेलिकॉम क्षेत्र में प्रवेश किया| उन्होंने जियो कंपनी लॉन्च की, जिसकी वजह से अन्य सभी टेलिकॉम कंपनियों को झटका लगा| वोडाफोन-आइडिया और एयरटेल की भी इसकी वजह से काफी नुकसान हुआ| जियो के आते ही अनिल अंबानी के RCom की रही-सही कसर भी निकल गई और मुसीबतें और भी बढ़ती चली गईं| पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी ने बिग सिनेमा, रिलायंस बिग ब्रॉडकास्टिंग और बिग मैजिक जैसी कंपनियों को बेचा है| 

7,539 करोड़ रुपए है रिलायंस समूह का बाजार पूंजीकरण

11 जून तक रिलायंस समूह का बाजार पूंजीकरण 7,539 करोड़ रुपए था| अनिल अंबानी की कंपनियों में से सबसे अधिक बाजार पूंजीकरण रिलायंस कैपिटल का, 2,373 करोड़ रुपए था| वहीं रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस पावर का बाजार पूंजीकरण क्रमश: 462 और 1,669 करोड़ रुपए था| रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग की बात करें, तो 11 जून तक इस कंपनी का मार्केट कैप 467 करोड़ रुपए था| रिलायंस होम फाइनेंस का पूंजीकरण 860 करोड़ रुपये, वहीं रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का बाजार पूंजीकरण 1708 करोड़ रुपये था| हालांकि मुकेश अंबानी ने छोटे भाई का सहयोग का प्रयास किया मगर तब शायद देर हो चुकी थी| अभी हाल में ही रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने सेबी के पास आईपीओ इशू करने के लिए कागजात जमा करने के बाद आईपीओ वापस ले लिया यह भी रिलायंस के टूटते भरोसे का प्रतिक प्रतीत होता है|