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अप्रत्यक्ष कर क्या है ? Apratyaksh Kar Kya hai

अप्रत्यक्ष कर यानी ऐसा कर जो अप्रत्यक्ष रूप से सरकार तक पहुँचती है

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है, अप्रत्यक्ष कर (Apratyaksh Kar) यानी ऐसा टैक्स जो अप्रत्यक्ष रूप से सरकार तक पहुँचती है, इस तरह के कर / टैक्स, प्रत्यक्ष कर के बिल्कुल विपरीत होते है। राज्य के द्वारा खपत, आयात, निर्यात और उत्पादन इत्यादि पर जो कर लगाया जाता है वह अप्रत्यक्ष कर होता है। अप्रत्यक्ष कर को सीधे अर्जक की आय या संपत्ति पर नहीं लगाया जाता न ही इनको किसी भी पर्ची पर दिखाया जाता है। उत्पादों की कीमत को बढ़ाने के लिए अप्रत्यक्ष कर में वृद्धि की जा सकती है, अप्रत्यक्ष कर एक स्थान्तरित कर है।

अप्रत्यक्ष कर (Apratyaksh Kar) के प्रकार

  1. बिक्री कर (Sales Tax)
  2. सर्विस टैक्स (Service Tax)
  3. उत्पाद कर (Excise Duty)
  4. प्रोफेशनल टैक्स ( Professional Tax)
  5. लाभांश वितरण कर (Dividend distribution Tax)
  6. मनोरंजन कर (Entertainment Tax)
  7. संपत्ति कर (property Tax)
  8. स्टाम्प ड्यूटी/ कर (Stamp Duty)
  9. वैट कर (VAT)
  10. टोल कर (toll Tax)
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अप्रत्यक्ष कर (Apratyaksh Kar) के तहत वस्तुओं को बेचने पर लगने वाले टैक्स को बिक्री कर (Sales Tax) कहते हैं, जिसका सीधा बोझ ग्राहक पर पड़ता है। जब निर्माता व्यापारियों पे कर का बोझ डालता है, तब उसके बाद थोक व्यापारी, दुकानदार या विक्रेता सामान पर बिक्री कर का चार्ज कर के बोझ को ग्राहकों को स्थानांतरित कर देता है।

सभी सेवाओं पर लगने वाले टैक्स को सर्विस टैक्स (Service Tax) कहते हैं। अभी भारत में आपको हर सेवा पर १५ फीसदी सर्विस टैक्स (Service Tax) देना पड़ता है। यह टैक्स छोटे कारोबारिओं अर्थार्त जिनका व्यवसाय १०लाख सेकम मूल्य का हो, पे नहीं लगायी जाती।

देश में बनने वाले उत्पादों पर लगने वाले कर को उत्पाद कर (Excise Duty) कहते हैं। यह कर निर्माता के द्वारा दिया जाता है। उस कर के बोझ को निर्माता बाद में थोक व्यापारी के कंधो पे डाल देता है। यह कर केंद्रीय सरकार द्वारा लगाया जाता है।

इसके अलावा सरकार वकीलों, डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेट्री जैसे पेशेवरों से प्रोफेशनल टैक्स ( Professional tax) वसूलती है।

जो कंपनियां अपने निवेशकों को अपने लाभ का हिस्सा देती हैं उन्हें सरकार को लाभांश वितरण कर (Dividend distribution Tax) देना होता है । कंपनी अगर अपने आय पर कर भरने का उत्तरदायी न भी हो, फिर भी उसे लाभांश वितरण कर भरना होता है।

राज्य सरकारें फिल्म , प्रदर्शनियों, DTH सर्विस और केबल सर्विस पर मनोरंजन कर (Entertainment Tax) लगाती हैं, जो आखिरकार ग्राहकों से वसूला जाता है। यह टैक्स राज्य सरकार के द्वारा लगाया जाता है ।

ईसके अलावा हर शहर का नगर निगम, किसी संपत्ति के मालिक से संपत्ति कर (property tax) वसूलता है। सम्पति के अंतर्गत सारी वास्तविक रियल एस्टेट (Real Estate) की वस्तुंए आती है। जैसे की घर, कार्यालय की ईमारत, या कोई ऐसी संपत्ति जो भाड़े पे दी गयी हो।

अगर आप कोई संपत्ति खरीदते हैं तो आप अपनी राज्य सरकार को स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) भी चुकाते हैं। यह सरकार द्वारा सभी तरह के कानूनी दस्तावेज़ो पे लगाया जाता है, प्रत्येक राज्यों में ये कर अलग होता है।

वैट कर (VAT Tax), वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर लगने वाला अंतिम कर है, इसलिए अंतिम रूप से उपभोगता द्वारा इस कर को दिया जाता है।

इसके अलावा टोल कर (Toll Tax) से तो आप सब वाकिफ हैं ही। लगभग हर शहर में सड़कों और पुलों के इस्तेमाल पर आपको टोल कर (toll tax) देना होता है।

१५ नवंबर २०१५ से टैक्स के दायरे में आने वाली सेवाओं पर केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत सेस लगाने का ऐलान भी किया है। देश में किसानों के हालात सुधारने के लिए कृषि कल्याण से भी लिया जाता है। दुःख की बात है कि भारत की कुल जनसंख्या के सिर्फ ४ फीसदी लोग ही आयकर (income tax) चुकाते हैं।