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अब तेल बिगाड़ेगा रसोईं का जायका

आयात महंगा होने से खाद्य तेलों के दाम में इजाफ़ा

देशवासियों को अभी महंगाई से निजात मिलने के आसार नही नजर आ रहे|प्याज की आसमान छूती कीमतें नियंत्रण में आने से पहले लहसुन ने मुश्किलें बढ़ाई|अब तेल भी महंगाई की इस जुगलबंदी में शामिल हो गया है|आयात महंगा होने बाद अब तेल की कीमतें भी महंगाई को भडकाने में बड़ी भूमिका निभाने जा रही हैं|विदित हो कि आयात महंगा होने से खाने के तमाम तेलों के दाम में भारी इजाफा हुआ है|ये बढ़ी हुई कीमतें आने वाले दिनों में रसोईं को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगी|

खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता बढ़ेगी:

भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है|भारत खाद्य तेल की अपनी अधिकांश जरूरतों को  आयात से पूरा करता है। बारिश और बाढ़ के कारण खरीफ की बुआई में सोयाबीन की फसल कमजोर रहने और रबी तिलहनों की बुवाई में काफी कमी आयी है|बुआई में कमी के कारण खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता और बढ़ेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी बुवाई के आंकड़ों के अनुसार, इस साल तिलहन फसलों का रकबा देशभर में 68.24 लाख हेक्टेयर हुआ है जोकि पिछले साल से 2.47 लाख हेक्टेयर कम है। जबकि सोयाबीन का उत्पादन देश में पिछले साल से तकरीबन 18 फीसदी कम रहने का अनुमान है। सोयाबीन प्रोसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के अनुमान के अनुसार, देश में इस साल सोयाबीन का उत्पादन 89.94 लाख टन है | ये पिछले साल के उत्पादन 109.33 लाख टन से 71.73 फीसदी कम है।

निर्यात की समस्याएँ:

मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल आयात लगातार महंगा होता जा रहा है।जबकि  अजेंटीना में सोया तेल पर निर्यात शुल्क बढ़ने से भारत में सोया तेल आयात की लागत बढ़ जाएगी, जिससे आने वाले दिनों में खाने के तेल की महंगाई और बढ़ सकती है। इन्ही कारणों से पाम तेल के दाम में बीते दो महीने में 35 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है। देश के बाजारों में पाम तेल का दाम करीब 20 रुपये प्रति किलो बढ़ा है। पाम तेल में आई तेजी से अन्य खाद्य तेलों के दाम में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है।विदित हो कि अर्जेटीना ने सोया तेल पर निर्यात शुल्क 25 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया है।

जानकारों का कहना है:

तेल-तिलहन बाजार विशेषज्ञ सलिल जैन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बीते दो महीने से खाने के तमाम तेलों के दाम को पाम तेल से सपोर्ट मिल रहा है और मलेशिया एवं इंडोनेशिया से लगातार पाम तेल का आयात महंगा होने से खाद्य तेल की महंगाई आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।जबकि खाद्य तेल उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी. वी मेहता का कहना है अंतर्राष्ट्रीय बाजार से आयात महंगा होने के कारण आज भारत में खाद्य तेलों के दाम में वृद्धि देखी जा रही, लेकिन इससे देश के किसानों को तिलहनों का ऊंचा भाव मिल रहा है, जिससे वे तिलहनों की खेती करने को लेकर उत्साहित होंगे।उन्होंने कहा, “हमें अगर, खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनना है तो किसानों को प्रोत्साहन देना ही पड़ेगा जोकि उन्हें उनकी फसलों का बेहतर व लाभकारी दाम दिलाकर किया जा सकता है।”