Arthgyani
होम > न्यूज > वैश्विक व्यापार

अमेरिका-चीन ट्रेड वार का लाभ भारत को नहीं मिलेगा

भारत में परमिट और मंजूरियां हासिल करना चुनौतीपूर्ण

अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वार से भारत को बहुत ज्यादा फायदा मिलता नहीं दिखाई देता है|ये नतीजे इकनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) की एक रिपोर्ट में सामने आये हैं| रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव की वजह से कुछ वैश्विक कंपनियां कुछ उत्पादन चीन से बाहर ले जा रही हैं, लेकिन इसका फायदा भारत को नहीं मिलेगा|

ईआईयू से जुड़े विश्लेषक सार्थक गुप्ता ने बताया कि , ”निवेश के मामले में भारत क्षेत्रीय समकक्षों की तुलना में पिछड़ सकता है,क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन को लेकर नीतिगत अड़चनें हैं| भारत के  श्रम कानून कड़े हैं और भूमि अधिग्रहण और परमिट की प्रक्रिया काफी मुश्किल है और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की संख्या सीमित है|”गुप्ता ने कहा, ”कॉरपोरेट कर में हालिया की गई कटौती से भारत के कारोबारी वातावरण का आकर्षण बढ़ेगा|इसके बावजूद भी भारत विनिर्माण के वैकल्पिक गंतव्य के रूप में चीन का स्थान नहीं ले पाएगा|

अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध जारी रहने से वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है|इन सब घटनाक्रमों के बीच दक्षिण पूर्व एशिया विशेषरूप से वियतनाम और थाइलैंड विनिर्माण गंतव्य के रूप में चीन का विकल्प बनकर उभर रहे हैं| यदि ब्राजील, पूर्वी अफ्रीका और बांग्लादेश में नीतिगत माहौल भारत की तुलना में अधिक तेजी से सुधरता है तो मध्यम अवधि में ये देश भी भारत की तुलना में अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकते हैं|

रिपोर्ट के अनुसार  विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग में 2019 में भारत की स्थिति काफी सुधरी है और साथ ही बुनियादी ढांचा निवेश भी बढ़ा है, लेकिन बड़ी परियोजनाओं के लिए यहां भूमि अधिग्रहण काफी समय लेने वाली महंगी प्रक्रिया है|इसके अलावा भारत में परमिट और मंजूरियां हासिल करना काफी चुनौतीपूर्ण है|