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अशोक लेलैंड में निवेश करें – विशेषज्ञों की सलाह

मंदी के दौर में फायदेमंद साबित हो सकता है अशोक लेलैंड

ऑटो सेक्टर के संकट के दौर का सबसे ज़्यादा असर हैवी कमर्शियल व्हीकल्स पर पड़ा है। ढुलाई की दरों में भारी नरमी, मौजूदा वाहनों के लिए एक्सेल लोड में बढ़ोतरी, ईंधन की बढ़ती हुई कीमत और इसकी कमजोर मांग ने भी इस पर असर डाला है।

कमर्शियल व्हीकल के सेल्स वॉल्यूम में 43 फीसदी की गिरावट और घरेलू सेल्स वॉल्यूम में सालाना रेट पर 74 फीसदी की कमी दर्ज हुई। हैवी कमर्शियल व्हीकल्स की विक्री बढ़ाने के उद्देश्य से 25 फीसदी के भारी डिस्काउंट से भी इन वाहनों की खरीदारी पर कुछ खास असर नहीं पड़ा है। जिसके कारण हैवी कमर्शियल वाहन बेचने वाले डीलरों के पास भारी मात्रा में स्टॉक है। ऐसे में अशोक लेलैंड ने अपने कुछ उत्पादन प्लांटों को बंद करने का फैसला किया।

वित्तीय वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के दौरान बिक्री में 27 फीसदी की कमी आई है। ज्यादा डिस्काउंट देने के चलते मुनाफ़े भी कम हो गयी है। कंपनी का  रेवेन्यू दूसरी तिमाही में करीब 50 फीसदी तक घटने का अनुमान हैं।  अप्रैल 2020 से बीएस-6 मानक लागू होने से  पहले इंवेंट्री को साफ करने की जरूरत होगी। इसलिए उत्पादन में निरंतर कटौती की जा रही है| चालू हैवी डिस्काउंट मार्च तक बने रहने की पूरी संभावना है।

इन तमाम बातों के बावजूद विश्लेषक अशोक लेलैंड को लेकर उत्साहित हैं। विशेषज्ञों का मानना है हाल में हुई बड़ी गिरावट के साथ कंपनी का रिस्क- रिवॉर्ड रेशियो अनुकूल हुआ है। पिछले एक साल में अशोक लेलैंड का शेयर 40 फीसदी नीचे आया है। इसकी तुलना में ईटी ऑटो इंडेक्स में 16 फीसदी की गिरावट आई है। चूंकि शेयर प्राइस पहले ही निचले स्तरों पर पहुंच रहे हैं, जितनी भी तमाम नकारात्मक खबरों के असर पड़ने थे वो पहले ही पड़ चुकें है। इसलिए अब लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह इस शेयर में पैसा लगाने का अच्छा मौका है। गौरतलब है कि कंपनी की बैलेंस शीट कर्ज मुक्त है। अतः अच्छे रिटर्न रेशियो से शेयर को कुछ बल मिलेगा।

बता दें कि हाल में सरकार की ओर से उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदमों से लंबी अवधि में कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट को फायदा होगा। कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर 22 फीसदी करने से कंपनी के पास अतिरिक्त पैसा बचेगा। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को कुछ और रियायतों का इंतजार है। जीएसटी दरों में कटौती की उम्मीद तथा प्रदूषण घटाने के लिए बहुत पुराने वाहनों के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी भी लाई जा सकती है। इन कदमों का अशोक लेलैंड को फायदा मिलेगा। इकॉनॉमिक टाइम्स के सर्वे के अनुसार 49 में से 24 विश्लेषक इस शेयर में खरीद की सलाह पर मुहर लगा रहे हैं,जबकि 13 का कहना है कि इसे होल्ड करना चाहिए।