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आउटडोर कैटरिंग पर जीएसटी घटाने की सिफारिश

आउटडोर कैटरिंग ने जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत सिफारिश की

बीते दिनों मंदी से बेहाल भारतीय बाजार ने जीएसटी काउंसिल  से जीएसटी की दरों को कम करने की मांग की है। काउंसिल बैठक में कुछ समय पहले ही FMCG, ऑटोमोबाईल जैसी बडी कम्पनीयों ने भी जीएसटी की दरों को घटाने की सिफारिश की थी। अब आउटडोर कैटरिंग ने भी जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बगैर) करने की सिफारिश की है।

सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल की 37वीं बैठक के लिए जीएसटी रेट सूची तैयार की गई है, उसमें 400 से 500 वस्तुओं और सेवाओं का जिक्र है, लेकिन इनमें से कुछ ही सेवाओ पर जीएसटी की दर घटाने की सिफारिश रेट फिटमेंट कमेटी ने की है। रेट फिटमेंट कमेटी में केंद्र और राज्य दोनों के अधिकारी शामिल होते हैं और किसी भी वस्तु या सेवा पर जीएसटी की दरें यही कमेटी निर्धारित करती है।

सूत्रों ने कहा कि, आउटडोर कैटरिंग के लिए जीएसटी की दर 18 परसेंट से घटाकर पांच परसेंट (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बगैर) करने की सिफारिश की है। इसी तरह माचिस, कप व प्लेट्स पर जीएसटी की दर घटाने की सिफारिश की है।

आउटडोर कैटरिंग की तरह कमेटी ने होटलों पर जीएसटी घटाने के दो विकल्प दिये हैं। पहले विकल्प के तहत प्रतिदिन 7500 रुपये से ज्यादा टैरिफ वाले होटल के कमरे पर जीएसटी की दर 28 परसेंट से घटाकर 18 प्रतिशत करने की सिफारिश की है। दूसरे विकल्प के तहत 7500 रुपये प्रतिदिन टैरिफ की सीमा को बढ़ाकर 10,000 रुपये या 12,000 करने की सिफारिश की है जिससे कि होटल रूम 18 प्रतिशत से कम जीएसटी दर हो सके|

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 20 सितंबर को गोवा में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में 7500 रुपये प्रतिदिन से अधिक टैरिफ वाले होटल कमरों पर जीएसटी की दर 28 परसेंट से घटाकर 18 परसेंट की जा सकती है। इसी तरह आउटडोर कैटरिंग पर भी जीएसटी की दर 18 परसेंट से घटाकर पांच परसेंट (इनपुट टैक्स क्रेडिट के बगैर) की जा सकती है। हालांकि, सरकार से प्रोत्साहन पैकेज की मांग कर रहे ऑटो सेक्टर को काउंसिल से निराशा हाथ लग सकती है।

सूत्रों ने कहा कि फिटमेंट कमेटी ने अपना मत दिया है कि इस क्षेत्र के लिए टैक्स में कटौती करने से सरकार के खजाने पर सालाना 50 से 60 हजार करोड़ रुपये का भार पड़ सकता है।

इस तरह काउंसिल बिस्कुट उद्योग की जीएसटी कम करने की मांग को भी खारिज कर सकती है।  गौरतलब है कि विदेशी पर्यटकों को भारत के होटलों में ठहरने के लिए काफी अधिक टैक्स चुकाना पड़ता है जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में होटलों पर टैक्स की दर अपेक्षाकृत कम है। इसके चलते बहुत से पर्यटक दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं।