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आज की कैबिनेट मीटिंग में हो सकते हैं कई अहम फैसले

 CCEA की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है आज| बैठक में ऑटो सेक्टर के स्क्रैपेज पॉलिसी समेत कुछ महत्वपूर्ण बिलों को मंजूरी मिल सकती है|

केंद्रीय कैबिनेट और CCEA(कैबिनेट कमिटी ऑन इकानॉमिक अफेयर्स) की बैठक में आज ऑटो स्क्रैप पॉलिसी (Auto Scrape Policy) पर फैसला हो सकता है| CNBC आवाज़ के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, CCEA यानी कैबिनेट कमिटी ऑन इकानॉमिक अफेयर्स की महत्वपूर्ण बैठक आज होने वाली है| इस बैठक में ऑटो सेक्टर के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी समेत कुछ महत्वपूर्ण बिलों को मंजूरी दी जा सकती है| इस बैठक में 15वें वित्त आयोग के रिपोर्ट सौंपने की मियाद बढ़ाने को मंजूरी मिलने की अटकलें भी हैं| इसमें सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल की चर्चा भी हो सकती है|

ऑटो स्क्रैप पॉलिसी

ऑटो सेक्टर (Auto Industry) को बूस्ट देने के लिए सरकार कई कदम उठाने जा रही है| इसके तहत ऑटो इंडस्ट्री में डिमांड बढ़ाने का प्रयास है| नई वाहन कबाड़ नीति में 2005 से पहले के पुराने वाहनों के फिटनेस नियम कड़े होंगे| बहुप्रतीक्षित वाहन कबाड़ नीति (स्क्रैप पॉलिसी) को कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है| सूत्रों का कहना है कि इस नीति में 2005 से पहले विनिर्मित वाहनों के लिए पंजीकरण और ‘फिटनेस’ नियमों को कड़ा किया जा सकता है|

बहुप्रतीक्षित वाहन कबाड़ नीति (स्क्रैप पॉलिसी) को कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है| सूत्रों का कहना है कि इस नीति में 2005 से पहले विनिर्मित वाहनों के लिए पंजीकरण और ‘फिटनेस’ नियमों को कड़ा किया जा सकता है| एक अनुमान के अनुसार देश में 2005 से पहले विनिर्मित दो करोड़ वाहन देश की सड़कों पर दौड़ रहे हैं| इस कदम का मकसद ऐसे वाहनों को ‘हतोत्साहित’ करना है|

नए प्रदूषण उत्सर्जन नियमों के हिसाब से देखा जाए, तो ऐसे वाहनों से प्रदूषण उत्सर्जन 10 से 25 गुना अधिक होता है| पिछले सप्ताह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि उन्होंने प्रस्तावित नीति पर कैबिनेट नोट को मंजूरी दे दी है और इस पर जल्द फैसले की उम्मीद है| इसी से संबंधित एक खबर यह थी की सरकार ने मारुती को देश की पहली कार क्रसर यूनिट लगाने की मंजूरी दी है| इससे भी स्क्रैप कारों के निबटारे में आसानी होगी|

15वें वित्त आयोग के कार्यकाल में वृद्धि 

विदित हो की जुलाई 2019 में भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2019 तक बढ़ाने की स्वीकृति दी थी| उस समय यह बताया गया था की इससे वित्त आयोग सुधार कार्यक्रमों को देखते हुए वित्तीय अनुमानों के लिए विभिन्न तुलना योग्य अनुमानों पर विचार कर और संतुलित ढंग से किया जा सकेगा|

15वें वित्त आयोग की पृष्ठभूमि : राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 280 की धारा (1) तथा वित्त आयोग (विविध प्रावधान) अधिनियम, 1951 का उपयोग करते हुए 27 नवम्बर, 2017 को 15वें आयोग का गठन किया| आयोग को अपने कार्य क्षेत्र के आधार पर 1 अप्रैल, 2020 से प्रारंभ 5 वर्षों की अवधि के लिए 30 अक्टूबर, 2019 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी|मगर कार्य पूर्ण न होने की वजह से इसके कार्यकाल में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है|

केंद्र सरकार द्वारा पिछले 4 वर्षों में किए गए प्रमुख वित्तीय/बजट सुधारों को ध्यान में रखते हुए 15वें वित्त आयोग का गठन किया गया है| इन सुधारों में योजना आयोग को समाप्त करना और उसकी जगह नीति आयोग लाना, गैर योजना तथा योजना व्यय के बीच भेद को समाप्त करना, बजट कैलेंडर एक महीना आगे बढ़ाना और पहली फरवरी को नया वित्त वर्ष प्रारंभ होने से पहले पूर्ण बजट पारित करना, जुलाई 2017 से वस्तु और सेवा कर (GST) लागू करना, उधारी तथा वित्तीय घाटा उपाय के साथ नया FRBM (Fiscal Responsibility and Budget Management) ढांचा बनाना शामिल है|

आयोग का कार्य क्षेत्र उपरोक्त वित्तीय/ बजट सुधारों को ध्यान में रखता है| केंद्र तथा राज्य सरकारों की व्यय और प्राप्तियों के निर्धारण कार्य के आधार पर आयोग द्वारा सिफारिशें करने में समय लगेगा क्योंकि प्रारंभ से अंत तक डाटा की निरंतरता और डाटा सेटों की जांच चुनौतिपूर्ण हो जाती है|

साथ ही कैबिनेट सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल पर भी चर्चा कर सकती है|