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देश के आम बजट से ज्यादा संपति 63 अरबपतियों के पास

2,153 अरबपतियों के पास इस धरती के 4.6 बिलियन लोगों से ज्यादा संपत्ति है

भारत देश मे अरबपतियों की कमी नहीं है।  लेकिन चौकाने वाली बात ये हैं कि 2020 का जितने का आम बजट पेश होने वाला है। उससे ज्यादा संपत्ति देश के 63 अरबपतियों के पास है।  सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के एक प्रतिशत के पास 953 मिलियन लोगों से चार गुना संपत्ति है। यह 953 मिलियन लोग देश की 70 प्रतिशत आबादी के निचले हिस्से में रहते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक असमानता चौंकाने वाली हैं। अरबपतियों की संख्या पिछले दशक में दोगुनी हुई है। जबकि पिछले साल उनकी संयुक्त संपत्ति में गिरावट आई है। आक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने इस मौके पर कहा, ‘अमीर और गरीब के बीच के फासले को खत्म करने के लिए असामनता फैलाने वाली नीतियों बदलना होगा सरकारे भी इस फासले को मिटने के लिए कोई पुरजोर कोशिश नहीं करती हैं। सरकारों को अमीर और गरीब के बीच के इस फासले को मिटाना चाहिए,मिटाने की पहल करनी चाहिए जिससे ये फासला मिटेगा नहीं लेकिन कम जरुर होगा।

डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की 50वीं वार्षिक बैठक से पहले यहां ‘टाइम टू केयर’ रिपोर्ट का विमोचन करते हुए राइट्स ग्रुप ऑक्सफैम ने कहा कि दुनिया के 2,153 अरबपतियों के पास इस धरती के 4.6 बिलियन लोगों से ज्यादा संपत्ति है जो इस दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी है। सोमवार से शुरू हो रहे डब्ल्यूईएफ के पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन में चर्चा के दौरान आय और लैंगिक असमानता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने की उम्मीद है। डब्ल्यूईएफ की वार्षिक वैश्विक जोखिम रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि 2019 में वैश्विक आर्थिक अर्थव्यवस्था में आर्थिक कमजोरियों और वित्तीय असमानता को लेकर दबाव बना रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि असमानता को लेकर चिंता लगभग हर महाद्वीप में सामाजिक अशांति को रेखांकित करती है। हालांकि यह अलग-अलग कारकों जैसे कि भ्रष्टाचार, संवैधानिक उल्लंघनों या बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं के लिए कीमतों में आई वृद्धि से प्रभावित होती है।बेशक पिछले तीन दशकों में वैश्विक असमानता में कमी आई है, लेकिन कई देशों में घरेलू आय असमानता बढ़ी है। खासतौर से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि लैंगिकवादी अर्थव्यवस्था असमानता को बढ़ावा दे रही हैं। इसके लिए वह आम लोगों खासतौर से गरीब महिलाओं और लड़कियों को निशाना बना रहे हैं।