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आरबीआई कर सकती है रेपो रेट में कटौती

पांचवीं मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में हो सकता है निर्णय

भारत की गिरती जीडीपी की दर मोदी सरकार की चिंता का सबब बन चुकी है|GDP की दरों में गिरावट के बाद शेयर बाजार में जारी बिकवाली को रोकने आरबीआई हर संभव प्रयत्न कर रही है|गौरतलब है कि देश की सकल उत्पाद वृद्धि कि दर चालू वित्त वर्ष की तिमाही में घटकर 4.5 प्रतिश रह गयी है|ऐसे में अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक छठी बार रेपो दर में कटौती कर सकता है|

ऑस्ट्रेलिया की ब्रोकरेज कंपनी मक्वैरी का अनुमान:

मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार यह अनुमान लगाया है ऑस्ट्रेलिया की ब्रोकरेज कंपनी मक्वैरी ने |रिपोर्ट में कहा गया है कि मौद्रिक नीति की समयसीमा को देखते हुए आरबीआई को फ़िलहाल प्रतीक्षा करो और देखो की नीति उचित लगती है|विदित हो कि  रिजर्व बैंक ने हाल ही में कर्ज दरों का लाभ आगे पहुंचाने के लिए कई प्रयास किए हैं| इसी प्रकार पांच दिसंबर को प्रस्तावित मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती की जा सकती है|RBI ने कई बार बैंकों की ब्याज दर को बाहरी बेंचमार्क दर से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है| रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ता और कारोबारी धारणा में सुधार अभी आना बाकी है, इस लिहाज से निकट भविष्य में आर्थिक वृद्धि(जीडीपी)के नीचे की ओर जाने के जोखिम की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता|

आरबीआई के प्रयास:

देश की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई|जीडीपी की वर्तमान दर पिछली 26 तिमाहियों में सबसे कम रही है|रिजर्व बैंक की चालू वित्त वर्ष की पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये अब तक नरम रुख अपनाया हुआ है|हमारा मानना है कि इसके बाद रिजर्व बैंक इस बात पर गौर करेगा कि इस वर्ष की लगातार छह समीक्षाओं में की गई समग्र कटौती का आगे क्या असर हुआ है|’मंगलवार को शुरू हुई रिजर्व बैंक की तीनदिवसीय बैठक गुरूवार तक चलेगी| इस बैठक में चालू वित्त वर्ष की पांचवीं मौद्रिक नीति समीक्षा गुरुवार को घोषित होनी है|

अब तक 1.35 प्रतिशत की कटौती :

जीडीपी की गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई ने समय समय पर हुई विभिन्न समीक्षाओं में अब तक ग्राहकों को लाभ देने के कई प्रयास किये हैं| इन प्रयासों में इस वर्ष फरवरी में रेपो दर में की गई 0.25 प्रतिशत की कटौती सहित अक्टूबर तक हुई पांच समीक्षाओं में कुल मिलाकर 1.35 प्रतिशत की कटौती की गयी है|फरवरी से अक्टूबर 2019 तक की पांच समीक्षाओं में रेपो दर 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.15 प्रतिशत तो हो गई,लेकिन इसका पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं मिल सका है|काबिलेगौर है कि इस दौरान बैंकों ने केवल 0.29 प्रतिशत कटौती ही आगे ग्राहकों तक पहुंचाई है|