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आरबीआई घटाएगा लंबी अवधि की ब्याज दरें

एफडी के निवेशकों की निवेशित रकम पर अब मिलेगा कम ब्याज

एफडी के निवेशकों की निवेशित रकम पर अब मिलेगा कम ब्याज|कम अवधि की ब्याज दरों को रेपो रेट व अन्य वैधानिक दरों को घटाने बाद केंद्रीय बैंक की नजर अब लंबी अवधि के ब्याज दरों पर है। रिजर्व बैंक करने जा रहा है लंबी अवधि की ब्याज दरों में कटौती|RBI के इस फैसले से करोड़ों बैंकिंग उपभोक्ता प्रभावित होंगे|बता दें आरबीआई इससे पहले कम अवधि की ब्याज दरों को घटा चुका है| 

अंतर्राष्ट्रीय बैंकों का अनुसरण:    

आरबीआई का ये निर्णय दरअसल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो फार्मूला दूसरे बैंक आजमाते हैं उससे  प्रभावित है।इस ओर कदम बढाते हुए आरबीआई ने गुरुवार को 2029 में परिपक्व होने वाले 10 हजार करोड़ रुपये के बांड्स को खरीदने और वर्ष 2020 में परिपक्व होने वाले 10 हजार करोड़ रुपये के बांड्स जारी करने का फैसला किया है।

सीनियर सिटीजन होंगे प्रभावित:

आरबीआई के ऐसे निर्णय से वैसे तो पूरा देश प्रभावित होगा| इसके बावजूद इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर सीनियर सिटीजन पर होगा| विदित हो कि निवेश के नियमों के अनुसार जोखिमपूर्ण निवेश के निर्णय कम उम्र में लिए जाते हैं| इसके पीछे वजह है बाजार की परिस्थितियों के सुधरने के लिए मिलने वाला समय|जबकि वृद्धावस्था में निवेश के सुरक्षित एवं निश्चित आय वाले विकल्प चुने जाते हैं|इसी कारण सीनियर सिटीजन निवेश के लिए फिक्स डिपोजिट को अधिक वरीयता देते हैं|

तरलता की स्थिति बेहतर होगी:

लंबी अवधि के बांड्स पर ब्याज दरों को कम कम करने वाले निर्णय के पीछे आरबीआई का तर्क तरलता को प्रोत्साहन देना है|बता दें अभी रेपो रेट और लंबी अवधि के बांड्स पर देय ब्याज दर का अंतर 1.50 फीसद के करीब है।केंद्रीय बैंक द्वारा जारी सूचना के अनुसार इससे बाजार में तरलता की स्थिति बेहतर होगी। बैंकिंग में इस  उक्त प्रक्रिया को आपरेशन ट्विस्ट के नाम से जाना जाता है। लंबी अवधि के सरकारी बांड्स पर देय ब्याज दरों को घटा कर केंद्रीय बैंक लंबी अवधि के ब्याज दरों को कम करने का रास्ता साफ करते हैं क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों पर देय ब्याज दरों के आधार पर ही लंबी अवधि के कर्ज की दरों के लिए भी ब्याज दरों का निर्धारण होता है।