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आर्थिक विकास दर धीमी लेकिन मंदी नहीं:निर्मला सीतारमण

भारतीय अर्थव्यस्था की औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत

अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है|किसी को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।आर्थिक विकास दर धीमी जरूर है लेकिन यह मंदी नहीं है।ये बातें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कही| वो बुधवार को राज्यसभा में ‘देश की आर्थिक स्थिति’ पर चल रही अल्पकालिक चर्चा का जवाब दे रही थी|गौरतलब कि वित्त मंत्री ने ये टिप्पणी ऐसे समय की है भारतीय रिजर्व बैंक समेत विश्व की कई रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट के आंकड़े जारी कर दिये हैं|

भारतीय अर्थव्यस्था की औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत:

एक ओर जब रिजर्व बैंक समेत विश्व की सारी रेटिंग एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट की बात कह रही हैं तो दूसरी ओर वित्तमंत्री ने इसके विपरीत तथ्य दिए|उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2019 की अवधि में भारतीय अर्थव्यस्था की औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत रही है| जबकि इससे पिछले पांच वर्ष की अवधि में यह आंकडा 6.4 प्रतिशत था। हाल की तिमाहियों में आर्थिक विकास दर में आयी गिरावट के तकनीकी कारण है और अर्थव्यवस्था की आधार बहुत मजबूत हैं। हालांकि वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ट तमाम विपक्षी दल इससे संतुष्ट नही थे| विपक्षी दलों ने कहा कि वित्तमंत्री वास्तविक सवालों का जवाब नहीं दे रही हैं।

आर्थिक विकास दर धीमी लेकिन मंदी नहीं:

सीतारमण ने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए देशहित और आम जनता के हित में 32 बिंदुओं पर फैसले किये हैं| जिनका प्रभाव जमीन पर दिखाई दे रहा है|आर्थिक विकास दर धीमी है लेकिन यह मंदी नहीं है। इसके तकनीकी कारण है और सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने सदन को बताया कि  खुदरा महंगाई, थोक महंगाई और खाद्य मुद्रास्फीति न केवल नियंत्रण में हैं, बल्कि वर्षों के निचले स्तर पर है | वर्ष 2019-20 में अभी तक विदेश प्रत्यक्ष निवेश 238 अरब डालर रहा है|विदेशी मुद्रा भंडार 440 अरब डालर से ऊपर पहुंच चुका है।

क्या कहती हैं रेटिंग एजेंसियां :

विश्व की तमाम रेटिंग एजेंसियों के विचार इसके विपरीत हैं|सरकार द्वारा  कॉरपोरेट कर की दर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत करने के कदम से 2019-20 के दौरान सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपए के राजस्व की हानि होने का अनुमान है।ये अनुमान व्यक्त करते हुए रेटिंग एजेंसी फिच ने बताया कि, ‘हम राजस्व वृद्धि के अपने अनुमान को भी संशोधित करके 13.1 प्रतिशत से 8.3 प्रतिशत कर रहे हैं। फिच सॉल्यूशंस ने कहा कि जीएसटी संग्रह और कॉरपोरेट कर संग्रह में कमी आने की वजह से राजस्व संग्रह 2019-20 के बजट अनुमान से कम रह सकता है। फिच ने कहा कि इसे देखते हुए हम 2019-20 के लिए अपने राजकोषीय घाटे के अनुमान को 3.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.6 प्रतिशत कर रहे हैं।’ शोध फर्म ने कहा, ‘हमारा मानना है कि राजकोषीय खर्च में कटौती नहीं करने की मंशा के बीच सुस्त आर्थिक वृद्धि और सरकार के कॉरपोरेट कर की दर में कटौती से राजस्व संग्रह कम रहेगा। इस वजह से हमने राजकोषीय घाटे के अनुमान को बढ़ाया है। ऐसे ही विचार मूडीज,आईसीआरए एवं रिजर्व बैंक ने भी व्यक्त किये हैं|