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वित्त वर्ष में आलू का वार्षिक उत्पादन 5.3 करोड़ टन

पिछले वर्ष 2017-18 में आलू उत्पादन 5.1 करोड़ टन था

भारत देश में सबसे ज्यादा आलू उत्पादन किया जाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है। लेकिन कुछ वर्षों में आलू के खुदरा भावों और थोक भावों के बीच काफी अंतर पाया गया है। इस वजह से देश के कई राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों द्वारा आलू की खेती में कमी हो रही है। क्यूँकि अत्यधिक उत्पादित फसलों को किसान कोल्ड स्टोर में रखते हैं। इस समय रबी फसल का सीजन चलने के बावजूद भी किसान आलू के बजाय ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की खेती कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन 

रबी के सीजन में किसान प्याज, लहसुन, गन्ना, सरसों जैसी फसलों की बुवाई कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने बताया कि, पिछले कुछ वर्षों में आलू के थोक और खुदरा मूल्य के बीच अंतर दो से तीन गुना तक बढ़ा है। इस वजह से आलू की खेती से किसानों की दिलचस्पी हटी है। और आलू के कारोबार को नुकसान पहुंच रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश आलू उत्पादक का प्रमुख राज्य है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, यूपी के मैनपुरी जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में लहसुन की खेती की जा रही है। और सेंट्रल यूपी में गन्ना की बुआई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि वह क्षेत्र आलू की खेती के लिए सर्वोत्तम है। वहीं आगरा में सरसों के रकबा में भी वृद्धि दर्ज हुई है।

आलू का थोक भाव घटा 

हांलाकि इस वर्ष आलू का थोक भाव 8 रूपये से कम रहा, इस वजह से किसानों को आलू की ज्यादा उपज को कोल्ड स्टोरेज में रखना पड़ता है। जिससे आलू फसल को काफी नुकसान हो रहा है। वित्त वर्ष 2018-19 में आलू का वार्षिक उत्पादन 5.3 करोड़ टन हुआ। जबकि पिछले वर्ष 2017-18 में आलू उत्पादन 5.1 करोड़ टन था। आलू के रकबा में वृद्धि होने से किसानों के साथ क्षेत्र के व्यापारियों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उनके मुनाफे में भी कमी आई है।