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इनकम टैक्स की लिमिट

इनकम टैक्स की सीमाओं में लगभग हर साल परिवर्तन किया जाता है

देश के नागरिक होने के नाते हर नागरिक का अपना-अपना कर्तव्य होता है| इन्ही कर्तव्यों में से एक होता है देश की तरक्की में योगदान देना| देश में तमाम तरह के विकास और सुरक्षा के कार्य जैसे सड़कें, बिजली, एअरपोर्ट आदि निरंतर जारी रहते हैं| इन कार्यों के लिए समय-समय पर धन की आवश्यकता पड़ते रहती है| इस धन की आपूर्ति सरकार द्वारा व्यापारियों और आम नागरिकों से टैक्स के रूप में वसूल कर किया जाता है| इन्ही टैक्सेस में से एक टैक्स होता है इनकम टैक्स|

इनकम टैक्स की लिमिट क्या है?

सरकार द्वारा विकास, सामाजिक और सुरक्षात्मक कार्यों के लिए आम नागरिकों से उनके आय की मात्रा के अनुसार उनसे टैक्स की वसूली की जाती है| इसी मात्रा अनुसार वसूली को इनकम टैक्स की लिमिट या इनकम टैक्स स्लैब कहा जाता है|

लोअर इनकम टैक्स लिमिट

मगर सरकार इनकम टैक्स वसूलने से पहले इस बात का ध्यान रखती है कि नागरिकों की प्राथमिक जरूरतें पहले पूर्ण हो जाए| उसके ऊपर के इनकम पर ही टैक्स की वसूली की जाए| इसी उद्देश्य से इनकम टैक्स वसूलने से पूर्व आय की एक निम्नतम आय की सीमा तय की जाती है| इसका मतलब होता है कि उतने से कम इनकम करने वाले लोगों से कोई इनकम टैक्स नहीं वसूला जा सकता है| इसे लोअर इनकम टैक्स लिमिट कहा जाता है|

हायर इनकम टैक्स लिमिट 

ऐसे ही इनकम टैक्स वसूली के लिए एक अधिकतम सीमा भी निर्धारित की जाती है, अर्थात इस मात्र से ज्यादा मात्रा पर पर इनकम करने से एक तय सीमा तक ही इनकम टैक्स की वसूली की जा सकती है| अधिकतम इनकम टैक्स प्रतिशत की सीमा तय करने के पीछे एक विचार है कि अधिक आय करने वाले लोग हतोत्साहित न हो जाए| इसे इनकम टैक्स की उच्चतम सीमा कहते हैं|

वर्तमान में न्यूनतम आय सीमा 2.5 लाख रूपए हैं, अर्थात इससे कम की सालाना आय पर किसी भी तरह की कोई इनकम टैक्स का भुगतान नहीं करना होगा| वैसे ही अधिकतम टैक्स लिमिट 30% है| अर्थात आप सालाना कितनी भी अधिक आय कर लें, आपसे 30% से ज्यादा इनकम टैक्स की वसूली नहीं की जा सकती|इन दोनों सीमाओं के बीच एक टैक्स स्लैब सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है, जोकि हर साल के लिए बदलते रहता है|

इस साल के लिए इनकम टैक्स स्लैब इस प्रकार हैं:

  1. रु. 2.5 से 5 लाख तक- 5%
  2. रु. 5 लाख से अधिक और रु. 7.5 लाख तक- 10%
  3. रु. 7.5 लाख से अधिक और रु. 10 लाख तक- 15%
  4. रु. 10 लाख से अधिक और रु. 12.5 लाख तक- 20%
  5. रु. 12.5 लाख से अधिक और रु. 15 लाख तक- 25%
  6. ₹15 लाख से अधिक- 30%