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इन म्युचुअल फंड्स में निवेश से हो सकती है परेशानी:

वोडाफोन-आइडिया में 3376 करोड़ का निवेश

म्युचुअल फंड में निवेश करने वाला निवेशकर्ता बड़े मुनाफे की आशाएं लगाये रखता है|कई बार बाजार को देखते हुए कुछ म्युचुअल फंड जोखिम से भरे हो जाते हैं| हालांकि फंड मैनेजर हमेशा अपनी ओर से शेयरों के चुनाव में अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं |इसके बावजूद कई बार निवेश की गयी राशि कंपनी के हालिया प्रदर्शन से घाटे का सौदा बन जाती है|आज हम बतायेंगे ऐसे ही कुछ फंड्स के विषय में जो अपने निवेश के कारण मुश्किलों में हैं|अगर आपने भी इन फंड्स में पैसा लगाया है तो ये खबर आपके लिए ही है|

वोडाफोन-आईडिया के वित्तीय संकट से प्रायः हर भारतवासी परिचित हो चुका है|वोडाफोन  आइडिया के ऊपर फिलहाल 99 हजार करोड़ की देनदारी है।इस सब के बीच विगत कंपनी का शेयर 95 फीसदी गिरकर दो साल के निचले स्तर तीन रुपये पर आ गया है। दूसरी तिमाही में कंपनी को 50,900 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ है।सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार कंपनी को एजीआर के तौर पर 39 हजार करोड़ रुपये 90 दिनों के भीतर चुकाने हैं। वोडाफोन-आइडिया द्वारा जारी बयान के अनुसार उसके पास करीब 27610 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस के तौर पर 30 सितंबर 2019 तक देनदारी थी। इसके अतिरिक्त 16540 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम प्रयोग के तौर पर और 33010 करोड़ रुपये ब्याज, जुर्माना और ब्याज पर लगे जुर्माने के तौर पर देना है। समय पर भुगतान न होने की स्थिति में भारत में इन कम्पनियों का भविष्य अँधेरे में है|ऐसे में कुछ म्युचुअल फंड्स कम्पनियों द्वारा वोडाफोन में निवेश कि खबरें आ रही हैं|कंपनी की वर्तमान दशा को देखते हुए फिलहाल निवेश करने वाले फंड्स मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं|

इन म्युचुअल फंड कंपनीयों ने किया है निवेश:

देश की कई प्रमुख म्युचुअल फंड कंपनियों ने भी घाटे से बेहाल हुई सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आइडिया में करीब 3376 करोड़ रुपये का निवेश कर रखा है। ऐसे में अगर यह टेलीकॉम कंपनी दिवालिया होती है, तो फिर इन म्यूचुअल फंड कंपनियों  पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।31 अक्तूबर तक, 35 से अधिक म्यूचुअल फंड स्कीम ने वोडा-आइडिया में निवेश कर रखा है।

स्कीम निवेश (फीसदी में) एयूम (करोड़ रुपये में)
फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन 5.08  5704

 

निप्पॉन इंडिया हाइब्रिड बॉन्ड 6.28 1594
यूटीआई बॉन्ड फंड  7.53  557
यूटीआई क्रेडिट रिस्क 10.99  2244
यूटीआई रेग्यूलर सेविंग्स  5.01 2309

 

टेलीकॉम सेक्टर हो सकता है बेहाल:

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट और हेड ऑफ रिसर्च डा. रवि सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले से ही बेहाल चल रहे टेलीकॉम सेक्टर की हालत और खराब हो सकती है। अभी जितनी कंपनियां इस सेक्टर में कार्यरत हैं, उन पर चार लाख करोड़ रुपये का बकाया है। नए निर्णय से इन कंपनियों को 1.3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बकाया बढ़ जाएगा। सरकार को टेलीकॉम सेक्टर को राहत देने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने पड़ेंगे, नहीं तो इससे डिजिटल इंडिया के कदमों पर ब्रेक लग जाएगा। जिन 16 कंपनियों को एजीआर का भुगतान करना है, उनमें से ज्यादातर बंद हो गई हैं।