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इमामी ग्रुप अपने सीमेंट बिजनेस को बेचकर चुकाना चाहता है कर्ज

इमामी ने बिज़नेस बेचने का किया ऐलान

इमामी ग्रुप ने अपने सीमेंट बिजनेस को बेचकर ग्रुप का कर्ज समाप्त करने का फैसला किया है। कंपनी ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अंत तक इसे बेचने का टार्गेट बनाया है ।
 ज्ञात हो कि इमामी की सीमेंट कंपनी पर 31 मार्च, 2018 तक 2,246 करोड़ रुपये का कर्ज था। अगर कम्पनी बिकती है तो  यह डील एक अरब डॉलर तक की हो सकती है।इमामी की 90 लाख टन सालाना की सीमेंट कैपेसिटी है l
इस सीमेंट बिजनेस को खरीदने के लिए देश की बड़ी बड़ी सीमेंट कंपनियां एक दूसरे से होड़ कर रही हैं।

कंपनियों ने बाइंडिंग ऑफर भेजे

न्यूज एजेंसी से ली गई ख़बरों के अनुसार इस डील के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की अल्ट्राटेक, नुवोको विस्टास (जो पहले निरमा सीमेंट के नाम से जानी जाती थी) को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। हालांकि लाफार्ज-होल्सिम कंपनी अंबुजा सीमेंट और पूर्वोत्तर की एक छोटी सीमेंट कंपनी स्टार सीमेंट से भी बाइंडिंग ऑफर मिले हैं।
विदित हो कि लफार्ज-होल्सिम को अपने ग्लोबल मर्जर से पहले कॉम्पिटिशन कमीशन के नियमों का पालन करने के लिए 1.1 करोड़ टन की सीमेंट कैपेसिटी वाले अपने प्लांट
2016 में पूर्वोत्तर भारत में  बेचने पड़े थे जिसे निरमा ने JSW सीमेंट जैसी बड़ी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़कर खरीदा था।
 बहरहाल इमामी द्वारा लिए गए कर्ज़ में से 2,093 करोड़ रुपये बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से सिक्योर्ड टर्म लोन के तौर पर लिए गए हैं l फिलहाल इमामी ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं दी है ।
इमामी ने पहले अपने पूरे सीमेंट बिजनेस के लिए 8,500-9,000 करोड़ रुपये का वैल्यूएशन मांगा था। लेकिन  ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इसके लिए 7,500 करोड़ रुपये से अधिक मिलना मुश्किल है।
कारण है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में सीमेंट की डिमांड कुछ घटने का अनुमान है। हालांकि, कंपनियों को अगले फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में ग्रोथ होने की भी उम्मीद है। सीमेंट कंपनियों की बिक्री सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और लो-कॉस्ट हाउसिंग से बढ़ सकती है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में सीमेंट की औसत कीमत दूसरे क्वॉर्टर में औसत कीमतों से 1.7 पर्सेंट कम थी। कमजोर डिमांड की स्थिति में कीमत का मजबूत होना सीमेंट कंपनियों के प्रॉफिट के लिए महत्वपूर्ण है
सूत्रों ने बताया कि श्री सीमेंट, डालमिया भारत और हाइडलबर्ग ने भी इमामी के सीमेंट बिजनेस में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन इन कंपनियों ने बाइंडिंग ऑफर नहीं दिए।

क्या है पूरी डील

इमामी की इस डील में सभी प्लांट यानी छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल में चार प्लांट हैं। इस के अलावा 30 करोड़ टन लाइमस्टोन डिपॉजिट वाली माइनिंग लीज शामिल होंगी। इमामी के पास देश के पूर्वी हिस्से के सीमेंट मार्केट में अल्ट्राटेक, लाफार्ज-होल्सिम और डालमिया भारत प्रत्येक की 17 पर्सेंट हिस्सेदारी है। निरमा की हिस्सेदारी 10 पर्सेंट और श्री सीमेंट की लगभग 14 पर्सेंट है। इमामी का बिजनेस खरीदने वाली कंपनी को इस मार्केट में 8 पर्सेंट अतिरिक्त हिस्सा मिल जाएगा।