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इस दिवाली हीरा उद्योग ने खोयी चमक

2008 से भी बुरे हैं हालात

भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंदी के ग्रहण ने छीन ली है हीरा उद्योग की चमक|मंदी मार से बेहाल कम्पनियों को मजबूर होकर अपना उत्पादन घटाना पड़ा है। इस साल ऐसा पहली बार हुआ है कि हीरे की दिग्‍गज कंपनी डी बीयर्स ने भी अपना उत्‍पादन घटा दिया है।भारत की हीरा नगरी कहे जाने वाले वाले सूरत शहर में इस बार कर्मचारियों को नही मिलेगा बोनस और गिफ्ट|

2008 से भी भीषण है ये मंदी:

सूरत के मशहूर हीरा कारोबारी सावजी भाई ढोलकिया  ने कहा कि हीरा उद्योग इस साल 2008 में आई भीषण मंदी से भी ज्यादा बुरे हालात हैं| ऐसे में हम दिवाली पर गिफ्ट का खर्च कैसे उठा सकते हैं? उन्होंने कहा कि हम हीरा कर्मचारियों की नौकरियों को लेकर चिंतित हैं|पिछले 7 महीनों में 40,000 से ज्यादा लोगों की नौकरियां चली गई हैं| इतना ही नहीं, जो कर्मचारी काम कर रहे हैं उनके वेतन में भी 40 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है|

कौन हैं सावजी भाई ढोलकिया?

बीते कई वर्षों से हम सभी दिवाली पर एक अनिवार्य खबर पढ़ते रहे हैं|वो खबर  गुजरात के हीरा व्यापारी सावजी ढोलकिया से जुड़ी होती है| वो हर साल अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले दिवाली बोनस के लिए चर्चा में रहते हैं| कभी कार, कभी फ्लैट तो कभी सोना| सावजी ढोलकिया ने विगत वर्ष अपने  600 कर्मचारियों को दिवाली पर कार गिफ्ट की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने अपने अन्य सैकड़ों कर्मचारियों को घर और ज्वैलरी भी दी थी| हरे कृष्ण डायमंड कंपनी के मालिक सावजी भाई ढोलकिया ने इसी साल कंपनी के तीन एप्लाई को मर्सिडीज कार भेंट की थी जिनकी कीमत 1-1 करोड़ रुपये थी। इससे पहले 2017 में उन्होंने अपने कर्मचारियों को 1200 ड्टसन रेडी-गो गिफ्ट की थी। वहीं 2016 में दिवाली बोनस के नाम पर 51 करोड़ रुपए भी दिए थे। 2015 में उनकी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस के तौर पर 491 कार और 200 फ्लैट बांटे थे। 2014 में भी कंपनी ने कर्मचारियों के बीच इन्सेंटिव के तौर पर 50 करोड़ रुपये बांटे थे। ढोलकिया २०११ से अपने कर्मचारियों को इसी प्रकार का बोनस देने के लिए मशहूर हैं|

इस बार बेहाल है हीरा उद्योग:

हीरा उद्योग को इस बार मंदी की नजर लग गई है|जिसके कारण गुजरात के सूरत में 5 लाख से अधिक कर्मचारी नुकसान में रहने वाले हैं|ढोलकिया का कहना है कि हीरा उद्योग वर्ष 2008 की मंदी से भी ज्‍यादा भीषण मंदी से गुजर रहा है|ऐसे में वो अपने कर्मियों को कोई कीमती तोहफा नहीं दे पाएंगे|बता दें कि  हीरे के सबसे बड़े खरीदार अमेरिका और चीन हैं। दोनों देशों के बीच ट्रेड वार चल रहा है।जिसके कारण मांग घट गई है। डायमंड कंपनियों ने उत्पादन घटा दिया है।हीरा उद्योग को या तो कर्मचारियों की संख्या घटानी पड़ रही है या काम के घंटे कम करने पड़ रहे हैं।इस दौरान  छोटी कंपनियों ने 10-20 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी की है। कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या तो नहीं घटाई, लेकिन काम की अवधि को नौ घंटे से घटाकर छह घंटे कर दिए हैं। कुछ कंपनियों ने तो रविवार के साथ शनिवार को भी छुट्‌टी देनी शुरू कर दी है।

80 फीसदी उत्पादन का निर्यात करता है सूरत:

सूरत दुनिया के सबसे बड़े डायमंड प्रोसेसिंग केंद्रों में शुमार है।यहाँ बने हीरे का 80 फीसदी से अधिक निर्यात होता है।सूरत में 3,500 से अधिक डायमंड प्रोसेसिंग यूनिट काम कर रहे हैं।सूरत का हीरा उद्योग लाखों लोगों के रोजगार का बड़ा केंद्र है|