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इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजार रहेगा सुस्त

इस सप्ताह बाजार पर अंतराष्ट्रीय कारकों का असर रहेगा

अमेरिका और चीन व्यापार पर चल रहे समझौते और वैश्विक प्रवृत्तियों की वजह से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा|जिससे इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजार काफी प्रभावित रहेगा|विश्लेषकों का कहना है कि बाजार पर अंतराष्ट्रीय कारकों का असर रहेगा|एजेंसी की खबर के मुताबिक़ बाजार में कई शेयरों में मजबूती दर्ज हुई है| सोमवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में बीएसई पर भारती एयरटेल के शेयर में सर्वाधिक 3.19 फीसदी दर्ज हुई है|

एसबीआई में 1.74 फीसदी, सन फार्मा में 1.34 फीसदी, टाटा स्टील में 1.32 फीसदी तथा टाटा मोटर्स डीवीआर के शेयर में 1.15 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई। वहीं, एनएसई पर इन्फ्राटेल के शेयर में सर्वाधिक 9.71 फीसदी दर्ज हुई| भारती एयरटेल में 9.24 फीसदी, एसबीआई में 5.54 फीसदी, जी लिमिटेड में 3.90 फीसदी तथा ग्रासिम में 3.05 फीसदी की तेजी देखी गई।

विश्लेषकों की राय के अनुसार 

सैमको सिक्युरिटीज एंड स्टॉक नोट के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिमीत मोदी ने बताया कि तिमाही परिणाम आ गये हैं, लेकिन घरेलू बाजार पर अमेरिका-चीन व्यापार समझौता जैसे अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर होगा। सकारात्मक संकेतकों के अभाव में बाजार नरम और सीमित दायरे में रह सकता है।

एपिक रिसर्च के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मुस्तफा नदीम के अनुसार सप्ताह के दौरान चीन के ब्याज दर के बारे में निर्णय और अन्य आंकड़े अमेरिका से आ रहे हैं। हांगकांग में स्थिति खराब है क्योंकि पुलिस ने शहर में व्यवस्था के समाप्त होने की चेतावनी दी है। अगर अमेरिका और चीन व्यापार के अंतरिम व्यापार समझौता करने पर सहमत होते हैं, तो बाजार पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में मामूली 33 अंक की वृद्धि हुई।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका-चीन व्यापार समझौते में प्रगति के संकेत हैं। इसका वैश्विक बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हालांकि, घरेलू बाजार के आर्थिक आंकड़ों से निवेशकों को भरोसा नहीं मिल रहा। लेकिन आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए RBI कार्य कर रही है, जिससे निवेशकों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। आरबीआई मुद्रास्फीति में वृद्धि के बजाए आर्थिक वृद्धि को गति देने पर ध्यान दे सकता है। इससे केंद्रीय बैंक नीतिगत दर में कुछ और कटौती कर सकता है और उसका लाभ ग्राहकों पर देने पर जोर दे सकते हैं।