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इस साल मेंथा का 38500-39000 टन उत्पादन होने का अनुमान

भारत मेंथा तेल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है

मेंथा भारत में इसे जापानी पुदीना के नाम से जाना जाता है| भारत मेंथा तेल और उसके खोज-परख का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है| भारत मेंथा का करीब 60 से 62 प्रतिशत निर्यात करता है|

इस साल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में किसानों ने पिछले साल के भाव को मद्दे नजर रखते हुए इस साल उत्पादन में वृद्धि की है|  एक्सपर्ट का अनुमान है कि, इस साल मेंथा का उत्पादन 38500-39000 टन हो सकता है, जो कि 2013 और 2018 के बीच हुए औसतन 36,968 टन अधिक है| इसलिए इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले उत्पादन बेहतर होने की सम्भावना है|

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि अभी मेंथा में सतर्क कारोबार ही देखने को मिलेगा. पिछले दिनों मेंथा के भाव में गिरावट आने से खरीदारी कम दिख सकती है| अभी मेंथा 1271.1 रुपये के भाव पर है| लेकिन यह स्तर टूटता है तो मेंथा 1260.7 का भाव हो सकता है| वहीं अगर भाव में 1292.8 रुपये की बढ़त होगी तब यह स्थिर रहेगा| और स्तर टूटता है तो मेंथा के दाम 1304.1 रुपये प्रति किलो तक जा सकते हैं|

एक्सपर्ट का कहना है कि मेंथा की आवक में बढ़ोतरी की वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है| बिहार सरकार की तरफ से सभी तरह के पान मसालो पर बैन के बाद भी कीमतों में नरमी दिखाई दे रही है| हालांकि मेंथा में निचले स्तरों से खरीददारी देखने को मिल सकती है| सर्दियों में भी आमतौर पर दवा कंपनियों की मेंथा ऑयल के लिए घरेलू मांग बढ़ जाती है|

कल मेंथा 1281.50 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुआ| वहीं, बुधवार को 1.50 रुपये की गिरावट देखने को मिली और यह 1280 के भाव पर ट्रेड कर रहा है| बता दे, चीन और अमेरिका भारतीय मेंथा ऑयल के बड़े आयातक हैं| दोनो देशो के बीच चल रहे ट्रेड वार का असर कीमतों पर पडने की सम्भावना है| इस वजह से निर्यात कम रह सकता है और कीमतों पर दबाव बने रहने की सम्भावना है|

बता दे, मेंथा तेल का बड़े पैमाने पर भोजन, दवा, इत्र और फ्लेवरिंग इंडस्ट्री में उपयोग किया जाता है| चीन, अमेरिका और सिंगापुर जैसे प्रमुख देशों से आयात भी किया जाता है और आयात की मांग और डालर के रुपये की कीमत पर निर्भर करती है| सर्दियों में आमतौर पर दवा कंपनियों की मेंथा ऑयल के लिए घरेलू मांग बढ़ जाती है|