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ई-कॉमर्स कंपनियों के इस गोरखधंधे पर सरकार ने लगाईं रोक

गिफ्ट के नाम पर माल मंगा कर टैक्स में लगाते थे चूना

सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के गोरखधंधे पर रोक लगाने का फैसला किया है| अब ई-कॉमर्स कंपनियां गिफ्ट के नाम पर बेचने के लिए माल मंगाने के फर्जरी धंधा नहीं कर पाएंगी| विदित हो की सरकार की इस तरह के गलत तरीकों से बढ़ते व्यापार पर बहुत दिनों से नज़र थी| हालांकि सरकार ने इस फैसले में जरुरी दवाइयां और राखी को छुट प्रदान किया है|

विदेश व्यापार नीति में किया गया संसोधन 

विदेश व्यापार नीति 2015-20 में संसोधन करते हुए भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की अधिसूचना में विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कहा की, ‘ई-कॉमर्स पोर्टल, डाक अथवा कूरियर के माध्यम से खरीदी गई वस्तुओं सहित वस्तुओं के आयात को, जहां उपहार के रूप में सीमा शुल्क विभाग से मंजूरी मांगी जाती है, जीवन रक्षक दवाओं/औषधियों और राखी ( परंतु राखी से संबंधित उपहार नहीं) को छोड़कर, निषिद्ध करते हुए विदेश व्यापार नीति 2015-20 के पैरा 2.25 को संसोधित किया गया है| राखी को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25(6) के तहत छुट प्राप्त होगी| इसके अलावा सम्पूर्ण लागू शुल्कों के भुगतान के साथ उपहार के रूप में वस्तुओं का आयात अनुमत है|’

बहनों और मरीजों का रखा गया है ध्यान 

इस विज्ञप्ति में सरकार ने मरीजों का भी ध्यान रखा है| साथ ही राखी के रूप में गिफ्ट को मंजूरी दि गई है मगर राखी के साथ किसी भी उपहार पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है| हालांकि शुल्क का भुगतान करके गिफ्ट को पूर्व के भांति ही प्राप्त करते रहा जा सकता है| सरकार के इस फैसले से ई-कॉमर्स व्यापार के द्वारा गलत तरीके से आयात कर रही कंपनियों पर रोक लगेगी और उम्मीद है कि इससे सरकार की आय में वृद्धि होगी|

क्लब फक्ट्री ई-कॉमर्स कंपनी पर हुई FIR 

ई-कॉमर्स कंपनियों पर पहले भी गलत तरीके से व्यपार करने के इल्जाम लगते रहे हैं| अभी हाल ही में चीनी ई-कॉमर्स कंपनी क्लब फैक्ट्री, उसके निदेशकों जियालुन ली, गर्वित अग्रवाल और सीएफओ अश्विनी रस्तोगी पर प्रसिद्ध ब्रैंड्स के नकली सामान बेचने पर आईपीसी की धारा 420 और 406 के तहत धोखाधड़ी करने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी| शिकायत में कहा गया था की क्लब फैक्ट्री ने लोकप्रिय ब्रांडों पर भारी छूट का विज्ञापन देकर एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत ग्राहकों को नकली उत्पाद दिए हैं|

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता आलोक कक्कड़ ने क्लब फैक्ट्री से टाइटन घड़ी खरीदी थी, जिस पर 86 प्रतिशत की छूट थी और रे-बन के दो सनग्लासेज ऑर्डर किए थे, जिस पर 90 प्रतिशत की छूट दी गई थी| उन्हें 25 नवंबर को ऑर्डर मिला, जिसे खोलने पर उन्हें पता चला कि ऑर्डर किए गए दोनों उत्पाद नकली हैं| इसके बाद उन्होंने कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए टोलफ्री नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की| हालांकि, इस पर उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली|

बिना अनुमति के दे दिया सेलर का नाम 

वहीं क्लब फैक्ट्री की वेबसाइट पर सेलर का नाम महाकाल एंटरप्राइज और परफेक्ट टाइम्स दिया गया था| शिकायतकर्ता ने कंपनी को एनवॉइस की एक प्रति के लिए ईमेल किया था, लेकिन उन्हें एनवॉइस की वह प्रति नहीं दी गई| क्लब फैक्ट्री से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता ने टाइटन और रे-बन के कस्टमर केयर से संपर्क साधा| इसके बाद उन्हें पता चला कि दोनों कंपनियों का क्लब फैक्ट्री से कोई संबंध नहीं है और न ही वे अपने उत्पादों को क्लब फैक्ट्री के जरिए बेचते हैं|

कक्कड़ ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि क्लब फैक्ट्री के टोलफ्री नंबर पर दोबारा बात करने पर उनके प्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें धमकी दे दी| शिकायतकर्ता को कंपनी से मिली आपराधिक धमकी से संबंधित आईपीसी की धारा 506 के तहत भी कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है|

एफआईआर में कंपनी के दो निदेशकों, जियालुन ली और गर्वित अग्रवाल, कंपनी के सीएफओ अश्विनी रस्तोगी और क्लब फैक्ट्री के शिकायत अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 406, 506 और 120 बी के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक धमकी देने को लेकर मामला दर्ज कराया गया है| पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की आगे की जांच की जा रही है|

उम्मीद है की सरकार और आम जनता द्वारा उठाए जा रहे क़दमों से ई-कॉमर्स कंपनियां अपने व्यापार में हो रहे गलत व्यवहार और कार्यों पर प्रतिबन्ध लगाएंगी|