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ई-वे (e-way) बिल क्या होता है?

ई-वे बिल, कम्प्यूटर पर बना बिल होता है

आजकल अक्सर ही एक शब्द सुनने में आता ई-वे बिल|इसे सुनकर हर किसी के मन में ये जिज्ञासा होती है आखिर क्या है ये बिल?अगर इसकी शब्द संरचना पर गौर करें तो हमें काफी हद तक हमारे जवाब मिल जायेंगे|ये दरअसल दो शब्दों से मिल कर बना है|e(ई) जिसका अर्थ है इलेक्ट्रोनिक और way(वे) अर्थात रास्ता|इस आधार पर समझें तो ये रास्ते में काम आने वाला बिल है जो परिवहन से संबंधित है|आइये विस्तार से जानते हैं क्या ई-वे बिल?

क्या है ई-वे (e-way) बिल?

1 अप्रेल 2018 को देश में जीएसटी लागू होने के बाद बहुत से नए परिवर्तन हुए हैं|दरअसल GST के तहत इलेक्ट्रॉनिक रोड परमिट द्वारा वस्तुओं का एक राज्य से दूसरे राज्य के भीतर या बाहर आवागमन ई-वे बिल के जरिए होता है| 50,000 से अधिक राशि के वस्तुओं के आवागमन के लिए विक्रेता और खरीददाता को ई-वे बिल की आवश्यकता होती है| ई-वे बिल सभी प्रकार की सामाग्री जैसे स्टॉक की बिक्री या ट्रांसफर, कैपिटल गुड्स, नौकरी के काम के लिए भेजे गए सामान या बिजनेस के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रकम के लिए जरूरी होता है|

ऑनलाइन होता है तैयार

ई-वे बिल,इलेक्ट्रॉनिक अर्थात कम्प्यूटर पर बना बिल होता है|GST के लागू होने के बाद किसी माल को एक जगह से दूसरी जगह भेजने पर, उसके लिए ऑनलाइन  बिल तैयार करना अनिवार्य हो गया है।ये बिल जीएसटी पोर्टल पर भी दर्ज होता है।

क्या थी पुरानी व्यवस्था?

परमिट कि व्यवस्था देश में जीएसटी के पहले भी लागू थी|ये व्यवस्था सेल्स टैक्स  या राज्यों के वैट के अधीन आती थी| पुरानी टैक्स व्यवस्थाओं में माल परिवहन के लिए कागज पर बिल बनाया जाता था।जीएसटी के लागू होने के बाद कागज पर बनने वाला ये बिल कम्प्यूटर पर यानी इलेक्ट्रोनिक बनने लगा। बनने के बाद इसे GST के नेटवर्क पर अपलोड  कर दिया जाता है।पुरानी व्यवस्था में कागज पर बने बिल को रोड परमिट कहा जाता था|यही बिल GST लागू होने के बाद E-Way Bill कहा जाता है।

कब होता है प्रभावी?

अगर भेजे जाने वाले माल की कीमत 50 हजार रुपए से ज्यादा है तो उसके लिए E-Way Bill(ई-वे बिल) बनाना अनिवार्य है।साथ ही साथ इसे  जीएसटी पोर्टल पर दर्ज करना भी जरूरी होता है| GST पोर्टल  पर दर्ज करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से माल भेजने वाले (Supplier) की होती है।किंतु आवश्यकता समझने पर, माल मंगाने वाला  या माल वाहन से ले जाने वाला भी इसे दर्ज कर सकता है। 50000 रुपए से अधिक मूल्य का सामान चाहे उसे राज्य के अंदर भेजा जा रहा हो (Inter State Trade), या राज्य के बाहर (Intra State Trade), हर तरह के माल ट्रांसपोर्ट के लिए ई-वे बिल  बनाना अनिवार्य होगा।

कब मिलेगी छूट?

कुछ विशेष सामानों के लिए कीमत की इस सीमा में छूट का प्रावधान भी है| 50 हजार रुपए से कम कीमत का माल होने पर ई-वे बिल जारी करना आवश्यक नहीं है,| किंतु आवश्यकतानुसार माल को भेजने वाला या उसे प्राप्त करने वाला, चाहे तो ई-वे बिल जारी कर सकता है।

परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्नता:

दो व्यवसायीयों के बीच खरीद बिक्री की स्थिति में उसे भेजने के निम्न दो  विकल्प हो सकते हैं।

  • पहला, माल को बिक्रीकर्ता या उसके खरीददार के खुद के वाहन में भेजा रहा हो।
  • दूसरा, माल को किसी तीसरी पक्ष, यानी की परिवहन सेवाओं/ट्रांसपोर्ट के माध्यम से भेजा जा रहा हो।

दोनों अलग-अलग स्थितियों में E-Way Bill जारी करने की जिम्मेदारी इस प्रकार होगी।

  • जीएसटी में पंजीकृत कोई विक्रेता या उसे प्राप्त करने वाला कारोबारी, अगर अपने खुद के वाहन में माल ले जा रहा है तो उन्हीं में से किसी एक को ई-वे बिल जारी करना होगा।जिसमें पहली जिम्मेदारी माल के विक्रेता की बनती है।  माल रवाना करने से पहले उसे GST के पोर्टल  पर जाकर ये प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • तृतीय पक्ष या ट्रांसपोर्ट के माध्यम से माल भेजने की स्थिति में माल को परिवहन एजेंसी को सौंपने से पहले ही उसके विक्रेता  या क्रेता  ई-वे बिल जारी कर सकते हैं। अगर विक्रेता और क्रेता  ने ई-वे बिल जारी नहीं किया है तो माल रवाना करने के पहले ही परिवहन एजेंसी को खुद ई-वे बिल जारी करना होगा। हालांकि, इसमें भी कुछ जानकारी क्रेता और विक्रेता की ओर से भरी जाएगी।

उपरोक्त आधारों पर देखें तो माल की निकासी से पहले  ही E-Way Bill जारी कर दिया जाना चाहिए। चाहे कारोबारी खुद उसे जारी करके माल भेजें, या फिर ट्रांसपोर्ट  माल ले जाने के पहले उसे जारी करे। ई-वे बिल  को  जीसटी पोर्टल पर GST INS-1 Form के रूप में जारी किया जाता है।