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उदय योजना -आगामी बजट में कुछ नयी संभावनाएं

पूर्व में कई योजनाओं की जगह अब एक-दो योजना के जरिये ही सरकार अपना काम करेगी।

बीते वर्ष में बिजली वितरण कंपनियों को वित्तीय रूप से पटरी पर लाने की उदय योजना सफल रही है। इसमें और सुधार लाते हुये नई उदय योजना की आगामी बजट में घोषणा की जा सकती है। विदित हो वित्त मंत्री आगामी एक फरवरी को 2020-21 का बजट पेश करेंगी।

देश में बिजली उपलब्धता

समाचार एजेंसी से साझा की गयी सूचनाओं के अनुसार बिजली मंत्री आर के सिंह ने सोमवार को कहा कि बिजली वितरण कंपनियों को वित्तीय रूप से पटरी पर लाने की उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय योजना) सफल रही है और इससे बिजली वितरण कंपनियों का नुकसान कम हुआ है।

देश में बिजली उपलब्धता के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘अभी बड़े शहरों में 23-24 घंटे बिजली मिल रही है जबकि छोटे शहरों में यह 22 घंटे और गांव में 18 से 20 घंटे बिजली उपलब्धता है, जिसे 24 घंटे तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अभी बिजली की प्रति व्यक्ति खपत वैश्विक औसत की एक तिहाई है और आने वाले समय में गांवों में एयर कंडीशनर, रेफ्रीजिरेटर जैसे उपकरणों की खरीद होगी, उससे बिजली की मांग बढ़ने वाली है। इसमें और सुधार लाते हुये नई उदय योजना की आगामी बजट में घोषणा की जा सकती है।

नई उदय योजना

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के अंतरराष्ट्रीय बांड के एनएसई आईएफएसी गिफ्ट सिटी में सूचीबद्ध होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सिंह ने अलग से बातचीत में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने वित्त मंत्रालय की नयी उदय योजना के बारे में चर्चा की है। हमें बजट में इसकी घोषणा की उम्मीद है।’’उन्होंने ये भी कहा कि पूर्व में कई योजनाओं की जगह अब एक-दो योजना ही होगी और सरकार इन्हीं के जरिये अपना काम करेगी।

मुख्य बिंदु

  • बिजली वितरण कंपनियों को वित्तीय रूप से पटरी पर लाने की उदय योजना सफल रही है।
  • देश में बिजली उपलब्धता 18 – 20 घंटे तक पहुंची है।
  • बिजली वितरण कंपनियों के नुकसान को 15 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य है।
  • इस नुकसान को कम करने के लिए राज्यों को सब्सिडी के बारे में निर्णय करना होगा।
  • बिजली खरीद के लिये साख पत्र उपलब्ध कराने को अनिवार्य कर दिया है।
  • पूर्व में कई योजनाओं की जगह अब एक-दो योजना के जरिये ही सरकार अपना काम करेगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि राज्यों को केंद्र से बिजली क्षेत्र से जुड़े सभी लाभ प्राप्त करने के लिये नुकसान को कम करना होगा।बिजली वितरण कंपनियों के नुकसान को 15 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखते हुए सिंह ने कहा कि राज्यों को सब्सिडी के बारे में निर्णय करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘उदय योजना विफल नहीं हुई है।

उन्होंने कहा वितरण कंपनियों का नुकसान औसतन 22 प्रतिशत से कम होकर करीब 18 प्रतिशत पर आ गया है। इसे 15 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य है। पिछले साल अगस्त में केंद्र ने बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली खरीद के लिये साख पत्र उपलब्ध कराने को अनिवार्य कर दिया है। श्री सिंह ने कहा कि यानी इस क्षेत्र में बड़ा विस्तार होना है और मैं आश्वस्त करता हूं कि यह क्षेत्र व्यवहारिक होगा।