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एनर्जी और पेट्रोलियम के क्षेत्र में भारत 58 अरब डॉलर करेगा निवेश

भारत को गैस आधारित इकोनॉमी बनाने के लिए वैश्विक साझेदारी पर बल दिया जायेगा

भारत दुनिया के अर्थव्यवस्था के क्रम में की सातवें स्थान पर है| भारत को गैस आधारित इकोनॉमी बनाने के लिए वैश्विक साझेदारी पर बल देना आवश्यक है| पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति की ऊर्जा आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं। पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय, मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर से भारत की अर्थव्यवस्था को सुद्रढ़ बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन (एटीएफ) को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाएगा। वर्तमान में पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और प्राकृतिक गैस जैसे पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखा गया है और राज्य इन उत्पादों पर बिक्री कर लगाते हैं।

बता दें, भारत एनर्जी और पेट्रोलियम के क्षेत्र से जुड़े एक्सप्लोरेशन-प्रोडक्शन में 2023 तक भारत 58 अरब डॉलर का निवेश करेगा। छोटे तेल गैस क्षेत्र विकसित करने की (डीएसएफ) पॉलिसी के बेहतरीन परिणाम मिले हैं। वहीं लो कॉर्बन इकोनॉमी (निम्न कार्बन उत्सर्जक अर्थव्यवस्था) की तरफ भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत में कार्बन उत्सर्जन प्रति व्यक्ति अन्य विकसित और विकासशील देशों के मुकाबले काफी कम है। ओईसीडी सदस्य देशों में पर्यावरण अनुकूल नीतियों को प्रोत्साहित करने में सबसे आगे हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया एनर्जी फोरम 2019 सम्मेलन ने, “नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों से निश्चिन्त रहने की अपील की है| नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी ऊर्जा परियोजनाओं की सभी शर्तों का सम्मान किया जाएगा|

गौरतलब, वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कंपनी एक्ट (अधिनियम) में संशोधन कई संशोधन किए जायेंगे संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है| इसके अलावा कंपनी एक्ट से जुड़े और भी गंभीर सुधार जारी हैं।