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आर्थिक मंदी से बेजार एफएमसीजी की विकास दर

FMCG की विकास दर घटी

मंदी का असर अब कंज्यूमर गुड्स (FMCG) पर भी साफ नजर आने लगा है।एफएमसीजी की विकास दर जुलाई-सितंबर 2018 से पिछली चार तिमाहियों में घट गई है।उपभोक्ताओं को शहरी बाजारों में सस्ते दैनिक आवश्यक ब्रांडों में स्थानांतरित कर देने से ग्रामीण विकास धीमा हो गया। मार्केट रिसर्च फर्म नीलसन के अनुसार अप्रैल-जून क्वॉर्टर में एफएमसीजी  सेक्टर की वैल्यू ग्रोथ घटकर 10 पर्सेंट रही। विकास दर में लगातार कमी की ये तीसरी तिमाही है।

नीलसन के मुताबिक, मूल्य वृद्धि या राजस्व जुलाई-सितंबर 2018 में 16.5% से गिरकर इस साल जून तिमाही में गिरकर 10% रह गया। अगर बात पैकिंग वाले उत्पादों की बिक्री की करें तो इसी अवधि में ये आंकड़े 13.4% से गिरकर 6.2% हो रह गए हैं। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक वरुण बेरी ने वर्तमान मंदी का कारण उन कारणों के संयोजन को बताया, जिन्होंने उपभोक्ताओं को मितव्ययी बनने में मदद की है। ग्रामीण बाजारों में मंदी के अलावा, संपत्ति बनाने वाले सभी कारक नकारात्मक दिख रहे हैं।अचल संपत्ति बाजार के साथ ही शेयर बाजार में भी गिरावट का दौर जारी है। खेती-बाड़ी, कैश और रोजगार से जुड़े मसलों कारण विकास दर मे गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। नोटबंदी और जीएसटी से व्यापार में बाधाएं आने के कारण ये  सुस्ती बीते तीन सालो से प्रभावी है।

ग्रामीण क्षेत्रों की ग्रोथ में  कमी

आपको बता दे कि  FMCG पर कुल खर्च में देश के ग्रामीण क्षेत्र की हिस्सेदारी 37 पर्सेंट की है। गांवों में आमदनी, उपलब्धता और डिमांड में बढ़ोतरी से इन क्षेत्रों की ग्रोथ शहरों से 3-5 पर्सेंट अधिक रहती थी, लेकिन हाल की तिमाहियों में ग्रामीण क्षेत्रों की ग्रोथ में तेजी से कमी आई है। इससे मौजूदा वर्ष के दूसरे क्वॉर्टर में ग्रामीण क्षेत्रों की ग्रोथ शहरों की ग्रोथ के करीब आ गई है।आर्थिक मंदी के चलते एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मांग कमजोर पड़ रही है, जिससे कमजोर घरेलू निवेश और वैश्विक आर्थिक विकास दर के पूर्वानुमान के साथ जोखिम बढ़ रहे हैं। हाल के सप्ताहों में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने घरेलू और वैश्विक बाजारों में हेडवांड का हवाला देते हुए भारत के विकास के पूर्वानुमान को कम किया है।

एफएमसीजी में वैल्यू या रेवेन्यू ग्रोथ पिछले वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में दर्ज 16.2% की ग्रोथ रेट से लगातार घटती आ रही है।विशेषज्ञो के अनुमान के मुताबिक आमदनी में बढ़ोतरी की दर वित्त वर्ष 2020 की दूसरी और तीसरी तिमाहियों में और घटकर 5% रह जाएगी। इस तरह वित्त वर्ष 2020 एफएमसीजी के लिए पिछले 15 वर्षों में सबसे कम ग्रोथ वाला साल बन जाएगा। ऐसी कम ग्रोथ इससे पहले 2000-03 में दिखी थी।