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भारती एयरटेल को बड़ा झटका- 23,045 करोड़ रुपए का घाटा

जुलाई -सितंबर तिमाही में 23,045 करोड़ रुपए का घाटा, सबसे बड़ा नुकसान

इन दिनों देश की टेलीकॉम कंपनियां सबसे ख़राब दौर से गुज़र रही हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के बकाया चुकाने के आदेश से देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल को बड़ा झटका लगा है। भारती एयरटेल को वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानि जुलाई -सितंबर तिमाही में 23,045 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा नुकसान है।

रिकॉर्ड के मुताविक़ पिछले साल सितंबर तिमाही में 119 करोड़ रुपए का कंपनी को मुनाफ़ा हुआ था। इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार भारती-एयरटेल ने कहा कि नए अकाउंटिंग सिस्टम के कारण नतीजों की पिछले साल या पिछली तिमाही से तुलना नहीं की जा सकती। एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) मामले में सरकार को बकाया देनदारी के 28,450 करोड़ अलग रखने की वजह से इतना घाटा हुआ।  हालाँकि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान भारती एयरटेल का रेवेन्यू 4.7 फ़ीसदी बढ़कर 21,199 करोड़ रुपये हो गया है। इसी के साथ एयरटेल का भारतीय कारोबार से राजस्व सालाना आधार पर तीन फ़ीसदी बढ़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने नॉन-टेलीकॉम रेवेन्यू को भी एजीआर का हिस्सा मानने के दूरसंचार विभाग के दावे को बरकरार रखते हुए टेलीकॉम कंपनियों को बकाया भुगतान करने का आदेश 24 अक्टूबर को दिया था। टेलीकॉम कंपनियों पर कुल 1.33 लाख करोड़ रुपए बकाया होने का अनुमान है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने दिए आदेश में गैर दूरसंचार कारोबार से हुए राजस्व सहित सालाना एजीआर की मांग के केंद्र सरकार के फ़ैसले को सही ठहराया था। इसके तहत मोदी सरकार ने दूरसंचार कंपनियों से लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क को सरकारी ख़जाने में जमा करने की मांग की थी।

भारती एयरटेल ने एक बयान में कहा, “एजीआर मामले में कंपनी को राहत मिलने की उम्मीद है और ऐसा नहीं होने पर अदालत के फ़ैसले के आधार पर लाइसेंस शुल्क व स्पेक्ट्रम शुल्क (एसयूसी) के मद में तिमाही के दौरान कंपनी पर 28,450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।”

टेलीकॉम कंपनी ने कहा कि इस रकम में 6,146 करोड़ रुपये मूलधन, 12,219 करोड़ रुपये ब्याज, 3,760 करोड़ रुपये पेनाल्टी और 6,307 करोड़ रुपये पेनाल्टी पर ब्याज शामिल है। कंपनी ने ये भी कहा कि भले ही उसे इस असाधारण मद के बाद 23,045 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, लेकिन इस असाधारण मद को हटा दें तो कंपनी को 1,123 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) क्या है?

टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर का 3% स्पेक्ट्रम फीस और 8% लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले कंपनियां एजीआर की गणना टेलीकॉम ट्रिब्यूनल के 2015 के फ़ैसले के आधार पर करती थीं। सरकार का कहना है किराए, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन कोर स्त्रोतों से प्राप्त रेवेन्यू को छोड़ बाकी प्राप्तियां यानि विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) एडजस्टमेंट, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम भी एजीआर में शामिल होंगी।। इसी आधार पर वह टेलीकॉम कंपनियों से बकाया फीस की मांग कर रहा था।