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एयरटेल(AIRTEL)ने लगाई FDI की अर्जी

विदेशी कम्पनी बन जायेगी एयरटेल

वित्तीय संकट और भारी देनदारी से जूझ रही देश की सर्वप्रमुख टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर भारती एयरटेल ने सरकार से FDI की इजाजत मांगी है|इस प्रत्यक्ष विदेशी के माध्यम से एयरटेल जुटाएगी 4,900 करोड़ रूपये|एयरटेल ये निवेश सिंगापुर की सिंगटेल एवं अन्य विदेशी कम्पनियों से एकत्र करेगी|सरकार की इजाजत मिलने के बाद देश की सबसे बड़ी निजी टेलिकॉम कम्पनी विदेशी कम्पनी बन जायेगी|

व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और वित्तीय घाटा:

जियो से व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और समायोजित सकल राजस्व(AGR) की देनदारियों के कारण एयरटेल भारी दबाव का सामना कर रही है|एयरटेल को न्यायालय के निर्देश के अनुसार एजीआर के मद में सरकार को कुल 43,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाना है| ऐसी ही दशा वोडाफोन-आईडिया की भी है|इन्ही परिस्थितियों को ध्यान में रखकर airtel ने सरकार से सिंगापुर के सिंगटेल और कई अन्य विदेशी कंपनियों से आने वाले 4,900 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सरकार से इजाजत मांगी है|

कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घाटा:

हाल ही में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, वोडाफोन-आइडिया ने इस तिमाही में 50,921 करोड़ रुपए का घाटा दर्शाया था|इसे भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घाटा माना जा रहा है|कुछ ऐसी ही हालत एयरटेल की भी है| एयरटेल 23 हजार करोड़ के नुकसान में है|कंपनी पहले भी इस विषय में बता चुकी है|विदित हो कि एयरटेल ने  अगस्त में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया था कि उसे अपने कर्ज चुकाने के लिए विदेशी निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है|इस बात की पुष्टि हाल ही में एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने दूसरी तिमाही के नतीजों से हो गयी है|दोनों कंपनियों ने बताया है कि एजीआर की वजह से कुल 70 हजार करोड़ रुपये के करीब घाटा हुआ है|

विदेशी कंपनी हो जायेगी एयरटेल:

मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार भारती टेलीकॉम ने कंपनी में सिंगटेल और कई अन्य विदेशी निवेशकों से हासिल हो रहे 4,900 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी के लिए आवेदन किया है|इस निवेश के बाद भारती टेलीकॉम एक विदेशी कंपनी बन जाएगी, क्योंकि बहुल हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों की हो जाएगी|टेलीकॉम विभाग से इस महीने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी मिल सकती है|वर्तमान में भारती एयरटेल में इसके प्रमोटर सुनील भारती मित्तल और उनके परिवार की करीब 52 फीसदी हिस्सेदारी है|न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक एफडीआई आने के बाद कंपनी में विदेशी हिस्सा 50 फीसदी से ज्यादा हो सकता है|विदेशी हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक होने की दशा में नियम के मुताबिक कंपनी को विदेशी कंपनी मान लिया जाएगा|अभी भारती एयरटेल में कुल विदेशी हिस्सेदारी 43 फीसदी है|जो इस निवेश  के बाद बढ़कर 84 फीसदी तक हो सकता है|काबिलेगौर है कि एयरटेल पहले भी इस प्रकार की अर्जी लगा चुकी है|जिसे विदेशी निवेशक की स्पष्ट जानकारी न देने के कारण नामंजूर कर दिया गया था|