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Air India के निजीकरण के लिए सरकार जल्द मंगाएगी निविदाएं!

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर संवाददाताओं से संवाद के दौरान कही यह बात

सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को सरकार जितना संभालने की कोशिश कर रही है, वह उतनी ही बेकाबू होती जा रही है| सरकार ने 2007 के इंडियन एयरलाइन्स और एयर इंडिया के एकीकरण के बाद से कई वित्तीय सहायता भी प्रदान की, मगर स्थिति जस की तस रही| पहले तो कंपनी का घाटा लगातार बढ़ता गया और अब ऐसी स्थिति आ गई है कि एयर इंडिया कर्ज के भारी बोझ तले दब चूका है| नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार अब निजीकरण के अलावे कोई और विकल्प नहीं बच चूका है|

रोजाना हो रहा है 22 से 25 करोड़ रुपए का नुकसान

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि एयर इंडिया पर कर्ज का बोझ इस हद तक पहुंच चुका है जहां ऋण प्रबंधन असंभव है और एयरलाइन के निजीकरण के अलावा कोई उपाय नहीं है| उन्होंने कहा कि अगले कुछ सप्ताह में कंपनी के निजीकरण के लिए निविदा जारी की जायेगी| हालांकि निजीकरण नहीं होने की स्थिति में छह महीने में कंपनी के बंद होने की मीडिया में आयी खबरों को वह टाल गये| ज्ञात हो कि सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया का कर्ज बढ़कर 80 हजार करोड़ रुपये पर पहुँच गया है और उसे रोजाना 22 से 25 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है|

कोई देशी कंपनी ही कर सकती है एयर इंडिया का अधिग्रहण

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि, ‘हमें एयर इंडिया का निजीकरण करना है, इसमें कोई संदेह नहीं है| इसका कोई विकल्प नहीं है| कई निजी कंपनियों तथा स्थापित विमान सेवा कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है| आने वाले कुछ सप्ताह में इसके लिए निविदा जारी की जाएगी| तभी पता चल सकेगा कि कितनी कंपनियां वाकई इसे खरीदने में रुचि रखती हैं|’

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट करते हुए कहा कि, ‘रणनीतिक कारणों से सरकार चाहती है कि एयर इंडिया को कोई भारतीय कंपनी ही खरीदे| वर्तमान ‘एयरक्राफ्ट रूल्स’ के अनुसार किसी भारतीय विमान सेवा कंपनी में विदेशी कंपनी की अधिकतम हिस्सेदारी 49 प्रतिशत ही हो सकती है|’

ज्ञात हो कि एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है| इन हालातों में एयर इंडिया तेल कंपनियों को ईंधन का बकाया नहीं दे पा रही है| हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने भी ईंधन सप्लाई रोकने की भी धमकी दी थी| लेकिन फिर सरकार के हस्तक्षेप से ईंधन की सप्लाई को दोबारा शुरू किया जा सका| पूर्व में एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए सरकार द्वारा प्रत्यारोपित कठोर शर्तों की वजह से बहुत सारी कंपनियों ने रूचि दिखाने के बाद पीछें हट गईं| उम्मीद है सरकार का यह प्रयास रंग लाएगा और एयर इंडिया के निजीकरण का उनका प्रयास सही मुकाम पर पहुचेगा|