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ओडिशा खदानों की नीलामी में हिस्सा ले रहे हैं- एएमएनएस

एएमएनएस-आर्सेलरमित्तल और जापान की स्टील कंपनी निप्पन स्टील कॉरपोरेशन का संयुक्त उद्यम हैं।

एएमएनएस इंडिया ने कहा कि वो अपनी लौह अयस्क जरूरतों को संरक्षित करने के लिए ओडिशा में चल रही लौह अयस्क खदानों की नीलामी में भाग ले रही है। समाचार एजेंसी भाषा से मिली ख़बरों के अनुसार कंपनी के सीईओ दिलीप ओम्मन ने  बताया कि  “हम ओडिशा में चल रही खदानों की नीलामी में हिस्सा ले रहे हैं।”

ज्ञात हो कि एएमएनएस इंडिया दरअसल आर्सेलरमित्तल की 60 प्रतिशत और जापान की स्टील कंपनी निप्पन स्टील कॉरपोरेशन की 40 प्रतिशत का संयुक्त उद्यम हैं। भाषा के पूछे जाने पर कि उनकी कंपनी ने कितनी खदानों के लिए बोली लगाई है, उन्होंने आंकड़ों की जानकारी दिए बिना कहा कि “इसमें लौह अयस्क की मात्रा अधिक है, कोयले की कम है।”

40 खदानों की होगी नीलामी

उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति में हो रही असुविधा को देखते हुए ओडिशा सरकार ने खदानों की नीलामी करने का फैसला किया है। राज्य के खान इस्पात मंत्री प्रफुल्ल मलिक ने कहा है कि सरकार ने 40 खदानों की नीलामी करने का निर्णय लिया है  जिनमे से 24 खदान पहले की हैं जो बंद पडी हैं, शेष 16 खदान नई हैं।

नीलाम होने वाली खदानों में लौह अयस्क, मैगनीज, बक्साइट और लाइन स्टोन प्रचुर मात्रा में हैं।

कच्चे माल के स्त्रोतों को संरक्षित करनी होगी

भाषा से बातचीत में श्री ओम्मन ने कहा कि किसी भी इस्पात कंपनी को अपने कच्चे माल के स्त्रोतों को संरक्षित करना ही होता है इसलिए वह अपनी लौह अयस्क की जरूरतों को संरक्षित करने के लिए नीलामी प्रक्रिया में भाग ले रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि एक चीज जो रास्ते में आ रही है वो है ओडिशा में नीलामी प्रक्रिया में अनिश्चितता।

इस्पात क्षेत्र के बारे में ओम्मन ने कहा कि इस्पात उद्योग में मांग में नरमी है। विदित हो कि इस्पात बनाने के लिए लौह अयस्क एक प्रमुख कच्चा माल है और इसकी कीमत में किसी भी तरह का बदलाव सीधे इस्पात की कीमतों को प्रभावित करता है।इनदिनों के लौह अयस्क के दाम की बढ़े हैं और इसमें तेजी जारी है। इस्पात उद्योग को सुस्त मांग और अधिक लागत का सामना करना पड़ रहा है।