Arthgyani
होम > न्यूज > व्यापार समाचार > ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी

मंदी की जद में ओला और उबर भी

वित्त मन्त्री के बयान से सुर्ख़ियों में ओला उबर

बीते दिनो सरकार के 100 दिन पूरे होने  पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मन्त्री निर्मला सीतारमण के बयान ने ओला और उबर जैसी निजि यातायात कम्पनीयो को सुर्खी मे ला दिया था।अपने सम्बोधन में वित्त मंत्री ने आटो मोबाइल सेक्टर की मंदी को ओला और उबर से जोडा था।हालाकि  मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के सेल्स एंड मार्केटिंग विभाग के कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने पीटीआई-भाषा को एक इंटरव्यू में बताया कि भारत में कार खरीदने को लेकर धारणा में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है और लोग अपनी आकांक्षा के तहत कार खरीदते हैं।सरकार को इस दिशा में उचित प्रयास करने होंगे।कोर्पोरेट के अलावा दूसरे नजरिये से भी देखा जाय तो ओला और ऊबर भी मंदी से जूझती नजर आ रही हैं।

बीते जून महीने में इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि ओला और उबर की ग्रोथ रेट सुस्त पड़ गई है। बीते 6 महीनों के दौरान ओला और उबर के डेली राइड्स में सिर्फ 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पहले डेली राइड्स 35 लाख था जो अब करीब 36.5 लाख पर है। ओला और उबर के बिजनेस की गति धीमी पड़ने का बडा प्रमाण कमर्श‍ियल व्हीकल रजिस्ट्रेशन से भी मिल रहा है. उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में 2017-18 में ओला और उबर इंडिया के लिए काम करने वाली 66 हजार 683 टूरिस्ट कैब रजिस्टर्ड हुई थी, लेकिन यह संख्या 2018-19 में घटकर 24 हजार 386 पर आ गई.

ध्यान रहे कि ऑटो सेक्टर में मंदी की वजह से घरेलू बाजार में अगस्त में वाहनों की बिक्री में 23.55 फीसदी की गिरावट हुई है।मंदी के कारण सरकार और कोर्पोरेट के बीच की तल्खी सतह पर आ गयी है।वित्त मंत्री के बयान पर बडी प्रतिक्रिया मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के सेल्स एंड मार्केटिंग विभाग के कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने दी है। उन्होने कहा कि,मौजूदा मंदी के पीछे ओला और उबर जैसी सेवाओं का होना कोई बड़ा कारण नहीं है। मुझे लगता है कि इस तरह के निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले हमें और गौर करना होगा और साथ ही बड़ा अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा कि ओला और उबर जैसी सेवायें पिछले 6-7 वर्षो में सामने आई हैं।जबकि इसी समय में में आटो उद्योग ने कुछ बेहतरीन अनुभव भी हासिल किये हैं। इसलिए केवल पिछले कुछ एक महीनों में ऐसा क्या हुआ कि मंदी गंभीर होती चली गई? मुझे नहीं लगता कि ऐसा केवल ओला और उबर की वजह से हुआ है।