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औद्योगिक उत्पादन में भारी कमी- क्या RBI ब्याज़ दरों में कमी करेगा?

माइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर में उत्पादन में बहुत तेज़ गिरावट।

माइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर में उत्पादन में बहुत तेज़ गिरावट देखने को मिल रही है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की 2011-12 की सीरीज़ में 4.3 फीसदी कॉन्ट्रैक्शन सबसे कम है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP),मई 2017 में  लॉन्च किया गया था। औद्योगिक उत्पादन में सितंबर में 4.3 फीसदी की कमी, बीते सात वर्षों में औद्योगिक उत्पादन का सबसे ख़राब आंकड़ा है। मुख्य रूप से कैपिटल गुड्स, माइनिंग और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल में गिरावट के चलते सितंबर में फैक्टरी आउटपुट पर असर पड़ा है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की 23 औधोगिक समूहों में से 17 ने ग्रोथ में निगेटिव प्रदर्शन दिखाया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में एक अहम योगदान होता है, इससे औधोगिक विकास का पता चलता है।

अब लोगों की निगाहें इसपर टिकी है कि क्या औद्योगिक उत्पादन में तेज गिरावट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज़ दरों में कमी करेगा?

इस सवाल पर इकोनॉमिक्स टाइम्स ने बताया कि बाज़ार के जानकार और अर्थशास्त्री अपनी अलग अलग राय रखते हैं।

अर्थशास्त्रियों की राय

देवेंद्र कुमार पंत, चीफ इकनॉमिस्ट कहते हैं इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च IIP बहुत ही अस्थिर रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती का सामना कर रही है। घरेलू बचत दर और कृषि विकास दर का घटना इसमें अहम हैं। कृषि विकास दर में कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आमदनी पर असर पड़ा है। श्री देवेन्द्र कहते है कि केंद्रीय बैंक इस बात का ध्यान रखेगा। इसके चलते उम्मीद है कि दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में बयाज़ दर को और घटाया जाएगा।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विस के चीफ इनवेस्टमेंट स्टैटेजिस् श्री विजय कुमार मानते है सितंबर में औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े कमजोर आने की आशंका पहले से थी। लेकिन, गिरावट अपेक्षा से ज्यादा है। अच्छी बात है कि खपत में 7 फीसदी का इजाफा हुआ है जो दिसंबर में रिकवरी के संकेत देता है।
मार्केट एक्सपर्ट अम्बरीश बालिगा कहते हैं, इस सुस्ती को काफी हद तक पहले ही मान लिया गया था। ऑटो सेक्टर में सुस्ती का असर करीब सभी सेक्टरों में पड़ने के आसार हैं। इससे बयाज़ दरों में एक बार और कटौती की उम्मीद बढ़ी है।

एम के ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज में हेड ऑफ करेंसी श्री राहुल गुप्ता भी मानते हैं कि RBI ब्याज़ दर में कटौती कर सकती है। वो कहते हैं सितंबर में आईआईपी में तेज गिरावट आई है। उत्पादन में लगातार सुस्ती आरबीआई को फिर एक बार ब्याज़  दरों में कटौती के लिए मजबूर कर सकती है। हालांकि, महंगाई दर में संभावित तेजी आने की आशंका को देखते हुए आरबीआई सतर्क रुख रख सकता है।