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कई देश क्रिप्टोकरेंसी अपनाने से बच रहे हैं: निर्मला सीतारमण

वर्चुअल करेंसी को क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है

किसी भी देश में मुद्रा के लेन देन के लिए सिक्कों और नोटों के चलन को क्रिप्टोकरेंसी के नाम से जाना जाता है| सिक्के, धातु या नोट को करेंसी कहा जाता है| दरअसल, इन दिनों बाजार में वर्चुअल करेंसी की डिमांड ज्यादा है| जिनमें मसलन, बिटकॉइन, नेमकाइन, लाइटकाइन और पीपीकाइन शामिल हैं। इस तरह के वर्चुअल करेंसी को क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि कई देश क्रिप्टोकरेंसी अपनाने से बच रहे हैं। कुछ देशों ने इसे स्थिर मुद्रा की संज्ञा देने से इनकार किया। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्वबैंक की वार्षिक बैठक में फेसबुक की प्रस्तावित क्रिप्टोकरेंसी ‘लिब्रा’ की चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने यह बात कही। हालांकि, सीतारमण से पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास क्रिप्टोकरेंसी पर भी अपनी राय दे चुके थे।

क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी मुद्रा है जिसे डिजिटल माध्यम के रूप में निजी तौर पर जारी किया जाता है। यह क्रिप्टोग्राफी व ब्लॉकचेन जैसी डिस्ट्रीब्यूटर लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी) के आधार पर काम करती है। ब्लॉकचेन एक ऐसा बहीखाता है जिसमें लेनदेन को ब्लॉक्स के रूप में दर्ज किया जाता है और क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल कर उन्हें लिंक कर दिया जाता है। क्रिप्टोग्राफी में सुरक्षित तौर पर सूचनाओं को सहेजने और भेजने के लिए कोड का इस्तेमाल किया जाता है और सिर्फ वही व्यक्ति उस सूचना को पढ़ सकता है जिसके लिए वह भेजी गई है।

विदित हो, आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जिवा का कहना है कि डिजिटल मुद्रा के फायदे और इसके जोखिमों के बारे में चर्चा की जा रही है।