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दुनिया के कबाड़ से भारत करेगा व्यापार  

पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 के द्वारा नए देशों से कबाड़ जहाजों के आने के लिए बढ़ेगी संभावनाएं- केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री

भारत दुनिया के कबाड़ से कमाई करने की तैयारी कर चूका है| भारत ने अपने शिपयार्ड रिसाइकिल व्यवसाय को बढाने की तैयारी कर रहा है| इसके लिए विगत दिनों केंद सरकार ने एक बिल पास किया है जिसके द्वारा भारत खुल कर इस व्यवसाय में आने की तैयारी में है| विदित हो की अभी तक पर्यावरणविदों की आलोचना की वजह से भारत सरकार इस व्यवसाय में खुल कर आने हिचकती थी, जबकि भारत के लोकेशन की वजह से इसके विकास की बहुत संभावनाएं हैं| मगर अंततः भारत सरकार ने पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 बिल के द्वारा खराब हो चुके जहाज को भारत में तोड़ने के व्यवसाय में अग्रणी बनने के लिए कमर कसने का निर्णय कर लिया है|

अभी 1,000 जहाजों में से 300 को रिसाइकिल करता है भारत 

अभी भारत वैश्विक स्तर पर दुनिया में वार्षिक आधार पर नष्ट किए जाने वाले 1,000 जहाजों में से 300 को रिसाइकिल करता है| इस बारे में वैश्विक संधि का अनुमोदन नहीं किए जाने की वजह से जापान, यूरोप और अमेरिका जैसे अभी अपने जहाजों को रिसाइक्लिंग के लिए भारत नहीं भेजते थे, मगर पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 से हुए बदलावों से इस परिदृश्य में बदलाव आएगा| इस कानून ने हांगकांग संधि को अनुमोदित कर दिया है| इसके तहत जहाजों की पर्यावरणनुकूल पुनर्चक्रण प्रक्रिया और पोत कारखाने में काम करने वालों के लिए पर्याप्त सुरक्षा का प्रावधान है|

1.3 अरब डॉलर से 2.2 अरब डॉलर करने का लक्ष्य 

भारत अब दुनिया के कई देशों के कबाड़ हो चुके युद्धपोतों और अन्य जहाजों की मदद से अपना खजाना भरने की तैयारी में है| क्योंकि केंद्र सरकार ने इसके लिए नया कानून (पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019) बनाया है, जिसके राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद यह कानून बन गया है| इस क़ानून के आने के बाद भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) बढ़ाने में युद्धपोत और अन्य जहाजों का महत्वपूर्ण योगदान होगा| सरकार वैश्विक पोत पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) कारोबार में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है| इससे देश के GDP में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 2.2 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगी, जो मौजूदा स्तर 1.3 अरब डॉलर से दोगुना होगी|

केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री स्वतंत्र प्रभार मनसुख लाल मंडाविया ने PTI भाषा से साक्षात्कार में कहा कि भारत युद्धपोत और अन्य जहाजों के लिए प्रमुख रिसाइक्लिंग गंतव्य के रूप में उभर सकता है| मंडाविया ने उम्मीद जताई कि पोत रिसाइक्लिंग गतिविधियों की देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में हिस्सेदारी बढ़कर 2.2 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगी, जो मौजूदा स्तर से दोगुना होगी|

अलांग है दुनिया का सबसे बड़ा रिसाइकिल शिपयार्ड

दुनिया भर के कबाड़ हो चुके जहाजों को तोड़ने के व्यवसाय में गुजरात के अलांग शिपयार्ड का नाम अग्रणी है| केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री स्वतंत्र प्रभार मनसुख लाल मंडाविया ने कहा कि गुजरात का अलांग दुनिया का सबसे बड़ा शिपयार्ड है| यह देश में जहाजों की रिसाइक्लिंग की बढ़ती संख्या को पूरा करने के लिए तैयार है|

अब यह देखना दिलचस्प है कि भारत के इस निर्णय से क्या सही में वैश्विक कबाड़ जहाज़ों की दिशा भारत की तरफ मुड़ती है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है|