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कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए उपज की गुणवता पर देना होगा ध्यान

कृषि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था का एक महत्‍वपूर्ण स्‍तंभ है

कृषि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था का एक महत्‍वपूर्ण स्‍तंभ है और इस सेक्‍टर में सुधारों पर तत्‍काल ध्‍यान देने की जरूरत है, क्‍योंकि देश की 60 प्रतिशत आबादी कृषि पर ही निर्भर है। कृषि निर्यात से जुड़ी वस्‍तुओं में विविधता लाना और उन बाजारों की तलाश करना समय की मांग है जहां निर्यात हो सकता है। उत्‍पादन की औसत लागत कम करनी होगी, ताकि भारत की कृषि उपज अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में प्रतिस्‍पर्धा कर सकें।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृषि वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कृषि उपज की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना चाहिए। वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने कहा कि राज्यों को कृषि के सभी क्षेत्रों में बेहतर गतिविधियों को कृषि निर्यात नीति में अनुकरण करना चाहिए।

नई निति के तहत कृषि निर्यात मे होगा इजाफा

इस नीति का उद्देश्‍य वर्ष 2022 तक कृषि निर्यात को वर्तमान 30 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना कर 60 अरब अमेरिकी डॉलर के स्‍तर पर पहुंचाना और फिर इसे अगले कुछ वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्‍तर पर ले जाना है। निर्यात वस्‍तुओं एवं गंतव्‍यों में विविधता लाना, शीघ्र खराब होने वाली वस्‍तुओं सहित अधिक कीमती एवं मूल्‍य वर्द्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देना है।

अनूठे, स्‍वदेशी, जैविक एवं गैर-पारंपरिक कृषि उत्‍पादों को बढ़ावा देना, बाजार पहुंच सुनिश्‍चित करने के लिए संस्‍थागत व्‍यवस्‍था करना, तकनीकी बाधाओं/एसपीएस से निपटना, वैश्‍विक मूल्‍य श्रृंखला (जीवीसी) के साथ एकीकृत कर विश्‍व कृषि निर्यात में भारत की हिस्‍सेदारी दोगुनी करना और किसानों को विदेश बाजारों में निहित निर्यात अवसरों से लाभ उठाने में समर्थ बनाना भी कृषि निर्यात नीति के अन्‍य लक्ष्‍यों में शामिल हैं।

कृषि की गुणवत्ता पर देना होगा ध्यान

सचिव के हवाले से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों को न केवल कृषि उपज की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए बल्कि गुणवत्ता को लेकर भी सजग होना चाहिए।’’ उन्होंने कृषि निर्यात नीति एवं संकुल विकास के क्रियान्वयन पर आयोजित दूसरे राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात कही।

वधावन ने कहा कि बागवानी, मत्स्यन, पशुपालन, उेयरी, खाद्य प्रसंस्करण समेत विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक योजना बनाने को लेकर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिये एक अवसर है। करीब 15 राज्यों ने कृषि निर्यात नीति क्रियान्वित करने के लिये नोडल एजेंसी, नोडल अधिकारी, राज्य स्तरीय निगरानी समिति और संकुल सुविधा प्रकोष्ठ बनाये हैं।