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कृषि जिंस देगा भारत को 97 अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई – FAO

खाद्य एवं कृषि संगठन का कहना है कि भारतीय कृषि जिंसों के निर्यात को बढाया जाना चाहिए।

खाद्य एवं कृषि संगठन ने कहा है कि भारतीय कृषि जिंस बेहद उम्दा हैं और इन कृषि जिंसों के निर्यात से भारत को 97 अरब डॉलर यानि लगभग 6.9 लाख करोड़ रुपये की अतिरक्त आय हो सकती है।

FAO ने कहा कि चुनिंदा कृषि जिंस और कई अन्य वस्तुओं के अलावा कृषि आधारित सामग्रियां जैसे मांस, दूध और फलों के निर्यात से भी भारत को अच्छा खासा मूल्य प्राप्त हो सकता है, परन्तु वर्तमान में  निर्यात के क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी कम है। न्यूज़ एजेंसी से साझा की गयी ख़बरों के अनुसार FAO के आंकड़े बताते है कि बेहतरीन संभावनाओ के होते हुए भी अंगूर, संतरे, केला, चिकन, मांस, दूध, पनीर और बटर मिल्क जैसे दुग्ध उत्पादों का निर्यात कम ही हो रहा है।

क्या है निर्यात की संभावनाएं

बृहस्पतिवार को खाद्य एवं कृषि संगठन के आंकड़ों के हवाले से विश्व व्यापार केंद्र ने एक बयान में कहा कि 19 जिंसों के लिए वर्ष 2017 में वैश्विक बाजार में देश की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत या लगभग 1.5 अरब डॉलर (लगभग 10,650 करोड़ रुपये) की थी जबकि संभावना 97 अरब डॉलर तक कमाई कर सकने की है। केले के लिए वैश्विक बाजार 15 अरब डॉलर के करीब है, जिसमें भारत का हिस्सा 48 करोड़ डॉलर ही है। इसी तरह, मांस और चिकन का वैश्विक बाजार 20.6 अरब डॉलर का है, लेकिन देश का निर्यात हिस्सा इसमें से केवल 4.04 प्रतिशत है। भारत अंगूर के निर्यात से सालाना केवल 27.5 करोड़ डॉलर कमाता है, जबकि वैश्विक बाजार से 8.6 अरब डॉलर कमाई की जा सकती है। मक्खन और गाय के दूध के निर्यात से आठ अरब डॉलर मिल सकते हैं, जबकि भारत को उनके निर्यात से एक पैसा भी नहीं मिलता है।  यह गौरतलब है कि लगभग एक तिहाई भारतीय कृषि उपज, भंडारण एवं उचित परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण बर्बाद हो जाते है। वैश्विक प्याज निर्यात बाजार तीन अरब डॉलर से अधिक का है, लेकिन भारत निर्यात से सिर्फ 42 करोड़ डॉलर कमाता है।

खाद्य एवं कृषि संगठन का कहना है कि भारतीय कृषि जिंस की वैश्विक बाज़ार में अच्छी मांग है और इन कृषि जिंसों के निर्यात को बढाया जाना चाहिए।