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कैफ़े कॉफ़ी डे की ग्लोबल विलेज टेक पार्क का सौदा पूर्णता की ओर

फेमस CCD ग्रुप के ग्लोबल विलेज टेक पार्क की प्रस्तावित बिक्री हफ्ते भर में पूरी हो जाने की उम्मीद।

फेमस कैफ़े कॉफ़ी डे ग्रुप के ग्लोबल विलेज टेक पार्क की प्रस्तावित बिक्री हफ्ते भर में पूरी हो जाने की पूरी उम्मीद है। ग्रुप  को इसके लिए सभी जरूरी सरकारी मंजूरी और ज्यादातर लेंडर्स का ग्रीन सिग्नल मिल चुका है।

ज्ञात हो कि कैफ़े कॉफ़ी डे एंटरप्राइजेज के संस्थापक वी.जी. सिद्धार्थ के जुलाई 2019 में निधन के बाद कंपनी मुश्किलों में फंस गई थी, तब उसने अपना टेक पार्क 2,700 करोड़ रुपये की एंटरप्राइज वैल्यू पर बेचने के लिए सितंबर में ब्लैकस्टोन और सलारपुरिया सत्वा ग्रुप के साथ डिफिनिटिव एग्रीमेंट किया था। 

कर्नाटक सरकार का विशेष योगदान

अब मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स ने इस प्रस्तावित सौदे को शुक्रवार को क्लीयर किया है जो कि बेहद जरूरी था। इस सौदे के लिए कॉफी डे एंटप्राइजेज को सेंट्रल और कर्नाटक गवर्नमेंट की मंजूरी के साथ 16 बैंकों तथा अन्य फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के NoC की जरूरत थी। न्यूज़ एजेंसी से मिली ख़बरों के अनुसार कंपनी को ज्यादातर मंजूरी मिल चुकी है और प्राइवेट लेंडर यस बैंक ने भी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। कुछेक बैंकों का NoC एक दो दिन में मिल जाने की पूरी संभावना है।

कर्नाटक सरकार के अफसरों के मुताबिक राज्य के चीफ मिनिस्टर बीएस येद्दियुरप्पा ने अपने अफसरों को निजी तौर पर कहा कि वे कॉफी डे को अप्रूवल देने की प्रक्रिया में तेजी लाएं क्योंकि कॉफी डे राज्य का ब्रांड है। इस पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखने वाले एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सीएम चाहते थे कि प्रपोजल को जल्द मंजूरी मिले क्योंकि कॉफी डे ग्रुप के सर्वाइवल पर लगभग 20,000 लोगों की नौकरी टिकी थी और उनमें से ज्यादातर नौकरियां कर्नाटक में थीं।’

लेंड रिफॉर्म्स एक्ट1961 रही सौदे में देरी की वजह

ब्लैकस्टोन और कॉफी डे को डील के लिए राज्य सरकार से कुछ क्लीयरेंस लेने थे परन्तु  कर्नाटक लेंड रिफॉर्म्स एक्ट 1961 का सेक्शन 109  इस डील में बाधा बन रहा था। इस मसले पर ख़ास तवज्जो देते हुए राज्य सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए उसका नोटिफिकेशन जारी करके हटा दिया। विदित हो कि तक़रीबन 90 एकड़ में फैला IT पार्क स्पेशल इकनॉमिक जोन (SEZ) रेगुलेशंस के दायरे में आता है इसलिए राज्य सरकार की कैबिनेट ने इसके लिए स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी माफ कर दिया।

कंपनी के बायर्स को पहली किस्त के तौर पर 2,000 करोड़ रुपये देने होंगे और बाकी रकम का भुगतान सौदे की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद करना होगा। कॉफी डे पर लगभग 4,800 करोड़ रुपये का कर्ज है जिसमे ग्रुप की सब्सिडियरी और इस IT पार्क की प्रमोटर टैंगलिन डिवेलमेंट्स पर बैंक के 100 करोड़ रुपये बकाया हैं। इस डील के पूरा होने के बाद होल्डिंग कंपनी को टैंगलिन का 1,700 करोड़ रुपये चुकाने में मदद मिलेगी।  ज्ञात हो वर्तमान में वी जी सिद्धार्थ के हाथों शुरू हुए ग्रुप के देश भर में 1500 स्टोर्स हैं।