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कोयले का आयात शर्मनाक बात!

पहले छह महीनों में 12.69 करोड़ टन कोयला आयात

क्या आप जानते हैं भारत विश्व के सबसे बड़े कोयला भंडार वाले देशों में शामिल है? इसके बावजूद भी हमें अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए कोयला अन्य देशों से आयात करना पड़ता है|इस आयात का निश्चित रूप से हमारी अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है|इस बात को समझाने के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का 2016 में दिये एक बयान का उल्लेख करना चाहूँगा|गोयल ने कहा था कि हम अगले 2 से 3 साल में थर्मल कोयले का आयात पूरी तरह रोकना चाहते हैं।2019-20 तक कोल इंडिया के लिए 1 अरब टन उत्पादन के साथ आत्मनिर्भर होने का लक्ष्य रखते हुए कहा उन्होंने कहा था कि, ‘हम कोयले के आयात को मंजूरी नहीं दे सकते, जबकि हमारे पास 300 अरब टन का विशाल भंडार है।’विशाल भंडार होने के बावजूद आयात में वृद्धि होना शर्मनाक बात है|जानते हैं कोल आयात के वर्तमान आंकड़े और प्रमुख कारण क्या हैं?

क्या कहते हैं आंकड़े?

देश का कोयला आयात चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में 9.3 प्रतिशत बढ़कर 12.69 करोड़ टन हो गया है|ये जानकारी उद्योग जगत के आंकड़ों से मिली|कोयला व इस्पात क्षेत्र की ई-वाणिज्य कंपनी एमजंक्शन के आंकड़ों के अनुसार,पिछले वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में कोयला आयात 11.60 करोड़ टन रहा था|एमजंक्शन ने बताया कि,मासिक आधार पर सितंबर महीने में कोयला आयात अगस्त की तुलना में 2.71 प्रतिशत कम होकर 1.86 करोड़ टन पर आ गया|यह इससे पिछले महीने यानी अगस्त में 1.91 करोड़ टन रहा था|जबकि सितंबर, 2018 में यह आंकड़ा 1.77 करोड़ टन रहा था|सितंबर में हुए कुल कोयला आयात में गैर-कोकिंग कोल का हिस्सा 1.22 करोड़ टन और कोकिंग कोल का हिस्सा 45.9 लाख टन रहा|

क्यों होता है आयात?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हैं जहां कोयले का सबसे अधिक भंडार है।इसके बावजूद हम कोयले का आयात करते हैं क्योंकि खनन में एकाधिकार प्राप्त कोल इंडिया पावर प्लांट्स, स्टील प्लांट्स, सीमेंट और फर्टिलाइजर्स यूनिट की आवश्यकताओं को पूरा करने लायक उत्पादन नहीं कर पा रही है।फरवरी 2018 में सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को भी कोयला खनन की मंजूरी दी है।हालांकि अभी तक इस पहल का कोई विशेष लाभ नजर नही आया है| कोयला खनन के लिए भूमि अधिग्रहण (जो राज्य सरकारों का विषय है), कई मंजूरी ( पार्यवरण और वन) और कोयला परिवहन (कोयला ढोने के लिए रेलवे रैक्स की कमी) जैसी चुनौतियां हैं।जिनके कारण भारत खनन में अपेक्षित वृद्धि नही कर पा रहा है|

इन देशों को हो रहा है लाभ:

भारत के द्वारा कोयले का आयात भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर है  लेकिन अन्य देशों के लिए ये लाभ की बात है|भारत के द्वारा अधिक कोयला आयात का लाभ इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों के लिए लाभदायक है। चीन के द्वारा प्र प्रदूषण में रोकथाम को देखते हुए कोयला आयात कम करने के बाद भारत विश्व का सर्वप्रमुख बाजार बन गया है|