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क्या म्युचुअल फंड के रिटर्न पर भी लगेगा टैक्स?

म्युचुअल फंड में दो प्रकार के रिटर्न कर चुकाने पड़ते हैं

हम सभी जानते हैं कि हमें अपनी आय पर निर्धारित स्लैब के अनुसार टैक्स चुकाना पड़ता है|आयकर की धाराओं के अनुसार हमें राष्ट्रीय संसाधनों से अर्जित हर आय पर निर्धारित कर चुकाना पड़ता है|ये कर मासिक आय संपत्ति संबंधी आय एवं निवेश संबंधित आय सब पर चुकाना पड़ता है|ऐसे में निवेशक के मन में हमेशा ये प्रश्न उठना लाजिमी है कि क्या हमें म्युचुअल फंड के रिटर्न पर कर चुकाना पड़ेगा?

क्या होगी रिटर्न पर कर की दरें?

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि म्युचुअल फंड में निवेश करने वाला हर निवेशक उच्च रिटर्नों को ध्यान में रखकर ही निवेश करता है|रिटर्न या प्रतिलाभ भी एक प्रकार की आय है जो हम अपने निवेशित धन से अर्जित करते हैं|अतः निश्चित है कि हमें म्युचुअल फंड की रिटर्न पर कराधान के निर्धारित नियमों का अनुपालन करना होगा| म्युचुअल फंड में डिविडेंड और कैपीटल गेन/लास दो प्रकार की आय होती है|अतः म्युचुअल फंड में मुख्य रूप से दो प्रकार के रिटर्न चुकाने पड़ते हैं| इसके अतिरिक्त फंड कि प्रकृति एवं निवेश कि अवधि के आधार पर भी कर की दरों में परिवर्तन हो सकता है|सीआईईएल के निवेश विशेषज्ञों के अनुसार म्युचुअल फंड से प्राप्त रिटर्न पर लागू होने वाले टैक्स निम्नलिखित हैं|

डिविडेंड इनकम टैक्स

निवेशक प्रायः डिविडेंड इनकम के लिए डिविडेंड ऑप्शन में निवेश करते हैं|ये आय वैसे तो टैक्स-फ्री होती है लेकिन इसमें डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) लगता है| इक्विटी फंडों में डीडीटी 10 फीसदी प्लस सरचार्ज और सेस होता है| जबकि नॉन-इक्विटी योजनाओं के लिए कर की दरें करदाता पर निर्भर करती हैं|

कैपिटल गेन(इक्विटी फंड)

सामान्य शब्दों में कहें तो Mutual Funds निवेश की बिक्री से हुए लाभ को कैपिटल गेन कहा जाता है | इक्विटी आधारित योजनाओं में निवेशित पूँजी को 12 महीने या उससे कम समय तक रखा जाता है तो उसे शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस कहते हैं|इस पर 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है|जबकि निवेश को 12 महीने से ज्यादा समय तक निवेशित होने पर अर्जित मुनाफे को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) कहा जाता है| इस पर 20 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना पड़ता है| यह कर एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा की निवेश राशि पर लागू होता है|

कैपिटल गेन – नॉन-इक्विटी

नॉन-इक्विटी स्कीमों में निवेशित राशि को 36 महीने या इससे कम समय के लिए रखा जाता है तो उसे शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस कहते हैं| इस निवेश पर 20% की दर से टैक्स लगता है| अगर निवेश को 36 महीने से ज्यादा समय के लिए रखा जाता है तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस कहा जाता है. इस पर उसी हिसाब से टैक्स लगता है कि जिस स्लैब में निवेशक आता है.

इंडेक्सेशन बेनिफिट

नॉन-इक्विटी योजनाओं में निवेशक लांग टर्म कैपिटल गेन के विषय में इंडेक्सेशन का लाभ भी ले सकते हैं|दरअसल इंडेक्सेशन का अर्थ है खरीद मूल्य को दोबारा गणना से है|इस प्रक्रिया में खरीद मूल्य में इनफ्लेशन को कम करने के बाद  कैपिटल गेंस घट जाते हैं|

ध्यान दें :

1-ईएलएसएस  स्कीमों में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है,जो कि 3 साल की लॉक-इन अवधि के साथ  होती है|

2-सिप के मामले में सिप की हर किस्त को अलग निवेश के तौर पर लिया जाता है| निवेश अवधि निवेश की तारीख से मानी जाती है.