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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Moody’s ने घटाई भारत की रेटिंग

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग को ‘स्थिर’ से बताया ‘नेगेटिव’

चालू वित्त वर्ष 2019 काफी सुस्त रहा, भारत के GDP ग्रोथ पर बड़ा असर पड़ रहा है|आर्थिक वृद्धि में बहुत कमी दर्ज हुई है|मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग को ‘स्थिर’ से ‘नेगेटिव’ बताया है। भारत के विकास दर में और गिरावट की आशंका को देखते हुए भारत की रेटिंग घटाई गई है। भारत के लिए बीएए2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग की पुष्टि की है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के मुताबिक़ भारत की वित्तीय हालत ठीक नहीं है, नौकरियां में भरती नहीं होने की वजह से बेरोजगारी बढ़ रही है| ऐसी परिस्थितियों में भारत की विकास दर और कम हो सकती है।अर्थव्यवस्था में गिरावट की आकंशा है जिससे जोखिम बढ़ सकता है|

Moody’s रेटिंग एजेंसी ने बताया कि, मूडीज के पूर्व अनुमान के मुकाबले वर्तमान की रेटिंग लंबे समय से चली आ रही आर्थिक एवं संस्थागत कमजोरी से निपटने में सरकार की नीतियां कम प्रभावित है। इस वजह से उच्च स्तर पर पहुंचा कर्ज और भी बढ़ सकता है। मूडीज ने वित्त वर्ष 2019-20 के अक्टूबर महीने में ग्रोथ रेट 5.8 फीसदी बताया, पहले मूडीज ने जीडीपी में 6.2 फीसदी की ग्रोथ होने का अनुमान जारी किया था। वहीं वित्त वर्ष 2020-21 में ग्रोथ रेट बढ़कर 6.6 फीसदी अनुमानित है।

वित्त मंत्रालय का मूडीज के रेटिंग घटाने कहना है कि, भारत अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है| भारत तुलनात्मक स्तर पर काफी ठोस है|अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा फंड (IMF) के अनुसार, भारत साल 2019 में 6.1 फीसदी और साल 2020 में 7 फीसदी की दर से विकास करेगा|केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था गति देने के लिए साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर जितना जीडीपी ग्रोथ बढ़ाने का निर्णय लिया है|

ध्यान दें, अप्रैल से जून तिमाही में भारत के जीडीपी में 5 फीसदी वृद्धि हुई, जो 2013 के बाद सबसे कम है। कमजोर मांग और सरकारी खर्च घटने की वजह से आर्थिक वृद्धि में रुवात दर्ज हुई है| एक साल पहले की समान अवधि में जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी था।