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गेंहूँ का अब तक हुआ 96.77 लाख हेक्टेयर में उत्पादन

पिछले साल गेंहूँ का  2.87 लाख हेक्टेयर उत्पादन हुआ था

चालू वित्त वर्ष 2019 में गेंहूँ  का उत्पादन लगभग 96.77 लाख हेक्टेयर रकबे में हुआ है|कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष देश भर में अच्छी बारिश होने से जलाशयों में काफी पानी एकत्रित किया गया है, इसलिए इस वर्ष गेहूं का रकबा और भी बढ़ सकता है|इस वर्ष किसानों को सिंचाई के लिए पानी की समस्या का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, पिछले साल गेंहूँ  उत्पादन 2.87 लाख हेक्टेयर था।

एजेंसी की खबर के मुताबिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत करनाल के निदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने रबी सीजन के बारे में बात करते हुए बताया कि भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान की बुवाई के आरंभ में ही इस साल रबी फसलों में खासतौर से गेहूं का रकबा बढ़ की उम्मीद की जा सकती है|

गेंहूँ के मुकाबले चने के उत्पादन में कमी 

इस साल सही मौसम न होने से चने के उत्पादन में कमी आयेगी, किसानों ने चने के बदले गेंहूँ की बुवाई में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है| केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ो के अनुसार, इस वर्ष चने का रकबे में पिछले साल के मुकाबले उत्पादन में करीब 22 फीसदी कमी दर्ज हुई है। पिछले साल जारी रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में चने की बुवाई अब तक लगभग 48.35 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले सामान अवधि में चने का रकबा 61.91 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार पिछले साल के मुकाबले इस साल चने का रकबा 21.90 फीसदी कम है।

रबी सीजन में गेहूं के रकबे में होगी बढ़त 

हर साल के मुकाबले इस साल रबी की सीजन रबी फसल में गेंहूँ सबसे चुनिन्दा फसल है, लेकिन इस वर्ष उत्पादन में थोड़ी कमी देखी गयी है| लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों गेंहूँ उत्पादन बढ़ेगा| क्योंकि इस वर्ष किसान चने की जगह गेहूं की बुवाई में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। अत्यधिक बारिश के कारण चने की फसल बुवाई में देरी हुई जिस वजह से किसानों को इस साल चने का अच्छा दाम नहीं मिल रहा है| यही कारण है कि, किसान चने की जगह गेहूं की बुवाई कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का निष्कर्ष 

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि देश में गेहूं और धान की सरकारी खरीद होने से किसानों को इन दोनों फसलों का उचित भाव मिल जाता है, यही कारण है कि किसान गेहूं और धान की खेती में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। लेकिन चना या दूसरी दलहनों व तिलहनों व अन्य फसलों की सरकारी खरीद व्यापक पैमाने पर नहीं होती है, इस वजह से सही मूल्य में खरीदार नहीं मिलते और चने फसल की बिक्री सही ढंग से नहीं होती है|

इसलिए किसान इस साल चना के बदले गेहूं की खेती में अच्छा प्रदर्शन दिखायेंगे, वहीं चने का कुछ रकबा गेहूं में शिफ्ट हो सकता है।