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चिटफंड वैध कारोबार है : अनुराग ठाकुर

चिट फंड संशोधन विधेयक-2019 को उच्च सदन की मंजूरी

पोंजी (Ponzi) और चिटफंड में अंतर है| पोंजी अवैध होता है जबकि चिटफंड वैध कारोबार है|गरीबों से जुड़ा पैसा सुरक्षित रहना चाहिए|उन्हें उनका पैसा वापस मिलना चाहिए, इसमें कोई अवरोध नहीं होना चाहिए| ये बातें वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कही|चिटफंड विधेयक सदन से स्वीकृति मिलने के बाद अब शीघ्र ही कानून के रूप में प्रभावी हो जाएगा| 

राज्यसभा में मिली मंजूरी:

उच्च सदन में इस विधेयक पर हुई चर्चा पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से इसे मंजूरी दे दी|बता दें कि चिटफंड के नाम पर हो रही धन उगाही को लेकर सदन में कई बार प्रश्न उठाये गये थे|संसद के सदस्यों ने निवेशकों के धन की सुरक्षा के उपाय करने के लिए सरकार से आग्रह किया था|काबिलेगौर है कि चिटफंड कई सालों से गरीब वर्ग के लोगों के लिए निवेश का प्रमुख स्रोत रहा है| इसकी अनियमितता को रोकने एवं चिटफंड सेक्टर के सुव्यवस्थित विकास में आ रही अड़चनों को दूर करने तथा  लोगों तक बेहतर वित्तीय पहुंच बनाने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने सदन में चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 पेश किया था|लोकसभा में इस प्रस्ताव को 20 नवंबर को ही मंजूरी मिल गयी थी|गुरुवार को उच्च सदन की मंजूरी मिलने के साथ ही इसके कानून के रूप में प्रभावी होने की मान्यता पर मुहर लग गई|

ये हुए बदलाव:

वित्त राज्य मंत्री के अनुसार विधेयक में चिटफंड की निवेश सीमा को तीन गुना बढ़ाने तथा ‘फोरमैन’ के कमीशन को 7 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है|विदित हो कि ‘फोरमैन’ का आशय उस व्यक्ति से है जो चिट चलाता है| ठाकुर ने बताया कि इसके तहत व्यक्ति के रूप में चिट की मौद्रिक सीमा को 1 लाख रूपये से बढ़ाकर 3 लाख रूपये किया गया है|जबकि फर्म के लिये इसे 6 लाख रूपये से बढ़ाकर 18 लाख रूपये कर दिया गया है|विधेयक में प्रस्तुत ये सभी प्रावधान दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा स्वीकार कर लिए गये|