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छह महीनों में पतंजलि को हुआ 148 फिसदी का मुनाफा

इन महीनों के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 3,562 करोड़ रुपये पर पहुंचा है|

पतंजलि आयुर्वेद कंपनी को दो साल पहले लागू हुए जीएसटी टैक्स के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा|लेकिन एक बार फिर पतंजलि आयुर्वेद नुकसान से उभर कर मुनाफे की ओर बढ़ी है| वित्त वर्ष 2019 के छह महीनों की तिमाही में अच्छा लाभ हुआ है| मौजूदा वित्त वर्ष के अप्रैल से सितंबर महीनों के तहत 148 फिसदी का मुनाफा हुआ है| इन महीनों के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 3,562 करोड़ रुपये पर पहुंचा है| कंपनी ने बताया कि रिकॉर्ड में अभी तक का यह पहला मुनाफा दर्ज हुआ है|

वित्त वर्ष के छह महीनों में पतंजलि को मुनाफा

पतंजलि आयुर्वेद को वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून के दौरान 1,793 करोड़ रुपये की आय हुई है|जिसमें 148 फीसदी का इजाफा हुआ है| वहीं पिछले साल  2018 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी की आमदनी 937 करोड़ रुपये थी|वित्त वर्ष के जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी की आमदनी 1769 करोड़ रुपये हुई है| पीटीआई की खबर के अनुसार, कंपनी के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने बताया है कि पतंजलि आयुर्वेद अपनी प्रोडक्ट लाइन में बदलाव कर उसे और बेहतर कर रही है| पिछले कुछ दिनों में प्रोडक्ट लाइनें, जो पहले पतंजलि संभालती थी अब उन्हें कई अन्य कंपनियों को सौंप दिया गया है|

पतंजलि के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2019 के जुलाई-सितंबर तिमाही में पतंजलि प्रोडक्ट की कुल सेल्स 1769 करोड़ रुपए थी जो कि पिछले साल समान अवधि में 1576 करोड़ रुपए थी। जुलाई 2018 से जुलाई 2019 के मध्य पतंजलि के डिटर्जेंट, हेयर केयर, साबुन और नूडल्स जैसी प्रोडक्ट की मार्केट से हिस्सेदारी कम हुई है। वहीं समानअवधि में केवल पतंजलि टूथपेस्ट प्रोडक्ट से बाजार में हिस्सेदारी बढ़ी है|पतंजलि FMCG के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं का कारोबार भी करती है|

पतंजलि के CEO बालकृष्ण ने बताया जीएसटी के कारण हुआ नुकसान-

कुछ दिनों पहले बालकृष्ण ने बताया कि दो साल पहले लागू हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण पतंजलि को नुकसान हुआ है| बालकृष्ण का कहना है कि जीएसटी के कारण कंपनी ट्रेड, सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल में सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाई है, जिससे नुकसान बढ़ा| हालांकि, मुनाफे के परिणाम तिमाही नतीजों में दिखना शुरू हो गए हैं|