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जानीये आईटीआर(ITR)-4 क्या है?

आयकर के '' पूंजीगत लाभ'' के तहत शामिल आय स्वीकार्य नहीं

आयकर जमा करना एवं आयकर रिटर्न फाईल करना दो बिलकुल भिन्न बातें हैं|आयकर की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत विभिन्न आयकर रिटर्न के उपबंधों का प्रावधान है|आईटीआर- 4 के अंतर्गत एकल हिन्दू परिवारों के रिटर्न का प्रावधान है| आज जानते हैं आईटीआर-4 क्या है?

कौन कर सकता है आईटीआर -4 का उपयोग?

आयकर कानून के अनुसार फार्म आईटीआर -4 का भी उपयोग किसी व्यक्ति या एकल हिन्दू परिवार द्वारा प्रयोग में लाया जा सकता है जो संपत्ति व्यवसाय या पेशे से जुड़ा हो।​

कौन आईटीआर-4 का प्रयोग नहीं कर सकता?

​आयकर प्रावधानों के अनुसार फार्म आईटीआर -4 का व्यक्ति से अलग व्यक्तिगत या एचयूएफ हो ,इसके अलावा, कोई व्यक्ति या एचयूएफ जो व्यवसाय या पेशे से आय प्राप्त नहीं करता आईटीआर -4 का प्रयोग नहीं कर सकता।​

आईटीआर -4 ध(सुगम) का प्रयोग कौन कर सकता है?

फार्म आईटीआर -4 एस(सुगम) का प्रयोग किसी व्यक्ति/ एचयूएफ द्वारा किया जा सकता है जिसकी कुल सालाना आय में निम्न शामिल हो:

  • धारा 44कघ या 44 कड़​ के प्रावधानों के अनुसार व्यवसाय से आय की गणना ,
  • वेतन/पेंशन से प्राप्त आय,
  • घर की संपत्ति से प्राप्त आय(उस मामले को छोड़ कर जहां पिछले साल के नुकसान को आगे लाया गया हो।),
  • अन्य स्रोतों से प्राप्त आय( लॉटरी जीतने या रेस कोर्स से प्राप्त आय को छोड़ कर)।

इसके अलावा, उस मामले में जहां अन्य व्यक्ति जैसे, पति या पत्नी, छोटे बच्चे आदि की आय को भी कर दाता की आय में जोड़ा जाएगा, इस विवरणी प्रपत्र​ का उपयोग केवल तभी किया जाएगा जब आय बतायी गयी  श्रेणी में शामिल हो।

आईटीआर-4 एस (सुगम ) का प्रयोग कौन नहीं कर सकता?

​​​​​फार्म आईटीआर-4 एस(सुगम) उस व्यक्ति/एचयूएफ द्वारा प्रयोग में नहीं लाया जा सकता जो:

  • जिसकी साल भर की कुल आय में एक से अधिक मकान की संपत्ति की आय शामिल है।
  • जिसकी साल भर की आय में लॉटरी से जीती गयी राशि या रेस कोर्स से हुई आय शामिल हो।
  • जिसकी साल भर की कुल आय आयकर के ” पूंजीगत लाभ” के तहत शामिल हो।
  • जिसकी साल भर की कुल आय में आय पर 5000 से ज्यादा की छूट शामिल हो।
  • जिसकी साल भर की कुल आय में सट्टा व्यापार तथा अन्य विशेष आय शामिल हो।
  • जिसकी साल भर की आय में धारा 44 कक(1) में संदर्भित पेशे से प्राप्त आय शामिल है।
  • जिसकी साल भर की आय में एजेंसी व्यापार या किसी प्रकार केकमीशन या ब्रोकेज की प्रकृति के आय शामिल है।
  • जिसने धारा 9090 तथा धारा 91 के तहत छूट के लिए दावा किया हो।
  • जिसके पास भारत से बाहर सम्पत्ति हो (किसी संस्था में वित्तिय हित सहित) या किसी भी खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकारी भारत से बाहर रहता है।
  • यदि आयकर दाता धारा 44कघ या धारा 44कड़ के तहत कराधान योजना के किसी भी व्यवसाय में संलग्न हो, परन्तु कराधान योजना को नहीं चुना है, तब ऐसा करदाता को धारा 44 क(क) ​ के तहत बही खाते बनाए रखने होंगे। तथा उसे अपने बही खातों का लेखापरीक्षण करवाना होगा।यदि वह आईटीआर 4( ध) का प्रयोग नहीं कर पाता है तो ऐसे करदाता को आईटीआर विवरणी प्रपत्र​ -4 भरना होगा।