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जानीये ई-निर्धारण योजना: 2019 के अंतर्गत प्रावधान?

ई-निर्धारण योजना आधुनिक इलेक्ट्रोनिक संचार के युग का आवश्यक प्रावधान है

ई-निर्धारण योजना आधुनिक इलेक्ट्रोनिक संचार के युग का आवश्यक प्रावधान है|केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत ई निर्धारण योजना: 2019 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 119 के अंतर्गत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए और अधिनियम की धारा 2(23ग) के प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड एतद्द्वारा निम्नानुसार निर्देश देता है|

  1. सभी मामलों में (बोर्ड द्वारा अधिसूचित ‘ईनिर्धारण योजना, 2019’ के अंतर्गत आने वाले मामलों को छोड़कर), जहां निर्धारण वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान अधिनियम की धारा 143(3) के अंतर्गत किया जाता है तो एतद्द्वारा निर्देश दिया जाता है कि ऐसे निर्धारण कार्यवाही नीचे दिए गए पैरा में अपवाद के अनुसार इलैक्ट्रानिक रूप से की जाएगी। तद्नुसार, निर्धारिती को ‘ई-दाखिलीकरण’ पोर्टल के कारण अपने ‘ई-दाखिलीकरण’ खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक रूप से (जबतक अन्यथा निर्दिष्ट न किया जाए) निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी किसी नोटिस/सूचना/ कारण बताओ के लिए अपने प्रतिउत्तर/प्रमाण को प्रस्तुत/प्रस्तुत करवाना आवश्यक है। ‘ई-कार्यवाही’ के माध्यम से बिना किसी परेशानी निर्धारण कार्यवाही करने के लिए आगे यह निर्देश दिया जाता है कि ‘ई-प्रक्रिया’ के अंतर्गत मामलों में सूचना की मांग मामलों के रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद की जाएगी।

2. निम्नलिखित मामलों में, जहां निर्धारण वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान किया जाना हो तो ‘ई कार्यवाही’ अनिवार्य नहीं              होगी|

  • जहां निर्धारण अधिनियम की धारा 153क, 153ग और 144 के अंतर्गत किया जाता है। अधिनियम की धारा 147 के अंतर्गत किए जाने वाले निर्धारण के संबंध में आईटीडी से आईटीबीए आदि तक डेटा के स्थानांतरण में कठिनाईयों के कारण ई-कार्यवाही से कोई छूट नीचे वाक्यांश (च) के अनुसार व्यवहारित होगी|
  • रद्द निर्धारण में |
  • गैर-पैन वाले मामलों में किए जा रहे निर्धारण|
  • मामले जहां आयकर विवरणी को कागजी विधि में दाखिल किया गया और संबंधित निर्धारिती के पास अभी तक ‘ई-दाखिलीकरण’ खाता न हो|
  • संबंधित स्थानों पर सभी मामलों में वीएसएटी के माध्यम से या बैंडविड्थ (ऐसे स्टेशनों की सूची प्रधान डीजीआईटी (पद्धति) द्वारा निर्दिष्ट की जाएगी) की सीमित क्षमता के अनुसार|
  • उक्त पैरा 1(i) के अंतर्गत आने वाले मामलों में क्षेत्राधिकारी प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त, असाधारण स्थितियों में जैसे ‘र्इ-कार्यवाही’ के माध्यम से निर्धारण करने में प्रशासनिक कठिनार्इयां या मामले की जटिलता, पारंपरिक विधि के माध्यम से निर्धारण कार्यवाही करने की स्वीकृति दी जा सकती है। एतद्द्वारा आगे यह निर्देश दिया जाता है कि प्रधान आयकर आयुक्त/आयकर आयुक्त को ऐसी छूट के लिए जरूरत की जांच के बाद और ऐसी छूट को देने के लिए कारणों को रिकॉर्ड करने के बाद ही असाधारण परिस्थितियों में ऐसी छूट देनी चाहिए।

3. हांलांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस मामले में नोटिस का निगर्मन और विभागीय संप्रेषण दस्तावेज पहचान संख्या   (डीआईएन) की उत्पत्ति/आवंटन/उद्धृतीकरण के संबंध में इसके परिपत्र सं. 19/2019 दिनांक के माध्यम से सीबीडीटी द्वारा   जारी दिशानिर्देशों द्वारा सख्ती से नियंत्रित की जाएगी।

4. यदि जहां निर्धारण प्रक्रियाओं को उक्त पैरा 1(i) के अनुसार ‘ई कार्यवाही’ के माध्यम से किया जा रहा हो तो निजी         सुनवाई/उपस्थिति निम्नलिखित परिस्थतियों में की जा सकती है|

  • जहां बही खातों की जांच किया जाना हो|
  • जहां निर्धारण अधिकारी अधिनियम की धारा 131 के प्रावधानों को तलब करता हो|
  • जहां गवाह का परीक्षण निर्धारिती या विभाग द्वारा किया जाना आवश्यक हो|
  • जहां किसी प्रतिकूल स्थिति पर विचार करते हुए कारण बताओ नोटिस निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी किया जाता हो और निर्धारिती मामले के वर्णन की निजी सुनवाई के लिए अपने ‘ई कार्यवाही’ खाते के माध्यम से अनुरोध करता हो|