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जानीये कितने प्रकार के होते हैं म्युचुअल फंड?

म्युचुअल फंड में विभाजन का आधार होता है निवेश प्रणाली

म्युचुअल फंड आज एक प्रचलित निवेश का माध्यम है|शाब्दिक अर्थों में देखें तो म्युचुअल फंड का हिंदी अर्थ है पारस्परिक निधि|सरल भाषा में कहें तो म्युचुअल फंड का अर्थ होता है सामूहिक निवेश|अर्थात वो निवेश जो विभिन्न म्युचुअल फंड कंपनियां निवेशकों का पैसा एकत्र करके शेयर बाजार या फिर किसी अन्य जगह पर लगाती हैं|इस निवेश का उद्देश्य होता है पैसे की ग्रोथ|इस निवेशित रकम की देख रेख का काम फंड मैनेजर करते हैं| निवेश के आधार पर म्युचुअल फंड के भी कई प्रकार होते हैं|आज जानते हैं म्युचुअल फंड के प्रकार|

म्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं?

निवेशक के मन में प्रायः ये प्रश्न होता है|म्युचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं|म्युचुअल फंड में विभाजन का आधार होता है निवेश प्रणाली|निवेश के आधार पर म्युचुअल फंड निम्न सात प्रकारों का होता है|

  • इक्विटी फंड – जो म्युचुअल फंड  मुख्य रूप से शेयर बाजार में निवेश करता है उसे इक्विटी फंड या  स्टॉक फंड कहा जाता है|इक्विटी फंड शेयर बाजार के अनुसार चलते हैं| मार्केट में तेजी होती है तो इन फंड्स की एनएवी भी तेजी से बढ़ती है लेकिन मंदी होने पर एनएवी भी कम हो जाती है| इक्विटी फंड हाई जोखिम पूर्ण किंतु उच्च प्रतिलाभ के  लिए जाने जाते हैं ।
  • डेट फंड  – डेट फंड सरकारी और कंपनियों की निश्चित आय सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं|ये फंड कॉरपोरेट बॉन्ड,सरकारी सिक्योरिटीज,ट्रेजरी बिल में निवेश करते हैं| सरकार और प्राइवेट कंपनियां अपने विभिन्न कार्यक्रमों को चलाने के लिए और लोन पाने के लिए बिल तथा बांड जारी करती हैं डेट फंड इक्विटी फंड जितने रिस्की नहीं होते लेकिन इनमें रिटर्न भी बहुत कम मिलता है यह फंड पैसा बनाने के लिए उपयोगी नहीं है।
  • बैलेंस फंड / हाइब्रिड फंड – इस प्रकार के फंड इक्विटी तथा डेट दोनों में निवेश करते हैं| जो कि 65 से 70 प्रतिशत इक्विटी और शेष डेट में निवेशित होता है|इसी खूबी के कारण  इन्हें बैलेंस फंड बोला जाता है| इसे हाइब्रिड फंड के नाम से भी जाना जाता है| इस फंड में जोखिम कम होता है|
  • गिल्ट फंड Gilt fund– इस फंड में किया गया निवेश सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है|इसमें निवेशित पैसा कंपनी विभिन्न  सरकारी योजनाओं में लगा देती है| सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश के कारण पैसा डूबने का खतरा नहीं होता| हालांकि इनमें रिटर्न भी कम होता है|
  • लिक्विड फंड  – लिक्विड फंड डेट म्‍यूचुअल फंड होते हैं| ये पैसा ट्रेजरी बिल्‍स, गर्वमेंट सिक्‍योरिटीज और कॉल मनी जैसे शॉर्ट टर्म वाले मार्केट इंस्‍टूमेंट्स में निवेश करते हैं। इन फंड्स के द्वारा 91 दिनों के परिपक्‍वता अवधि वाले यंत्र में निवेश कर सकते हैं। लिक्विड फंड का उपयोग निवेशक आमतौर पर एक से तीन महीने के समय के लिए करते हैं।
  • ग्रोथ फंड  – ग्रोथ फंड की सहायता से अधिकतम फायदा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। इनमें निवेश उन कंपनियों में किया जाता है जो बाजार में तेज प्रगति करती हैं। इन फंड्स में निवेश अधिक लाभ के लिए करते हैं और इस कारण से जोखिम अधिक होता है। ग्रोथ फंड के अंतर्गत पैसे को उन कंपनियों में निवेश किया जाता है जो कि बाजार में अच्छी ग्रोथ के साथ शानदार प्रदर्शन कर रही हैं ।
  •  मनी मार्केट फंड – मनी मार्केट फंड (MMF) एक प्रकार का निश्चित आय म्यूचुअल फंड है जो ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करता है। मनी मार्केट फंड अल्पकालिक आय प्रतिभूतियों जैसे सरकारी बांड ट्रेजरी बिल बैंकरों की स्वीकृति वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाण पत्रों में निवेश करते हैं|इनमें अन्य फंडों की तुलना में रिटर्न कम प्राप्त होता है| यह सबसे सुरक्षित फंड माना जाता है।