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जानीये म्युचुअल फंड्स पर जीएसटी का प्रभाव?

जीएसटी के बाद म्युचुअल फंड  महंगे हो गये  हैं

शीर्षक जरूर चौकाने वाला है|म्युचुअल फंड और जीएसटी के बीच क्या सम्बन्ध है?आप जरूर सोच रहे होंगे|सभी जानते हैं म्युचुअल फंड निवेश का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम है|जबकि जीएसटी समेकित कर का प्रावधान है|इस तरह से यदि देखें तो दोनों में काफी विभिन्नता है|किंतु इसके बावजूद भी जीएसटी सीधे तौर पर म्युचुअल फंड्स को प्रभावित करता है|आइये जानते हैं म्युचुअल फंड को कैसे प्रभावित करती है जीएसटी|

म्युचुअल फंड का सर्विस टैक्स बढा:

वस्तु एवं सेवा कर कानून (जीएसटी) के अमल में आने के बाद म्युचुअल फंड  महंगे हो गये  हैं। बता दें जीएसटी काउंसिल ने फाइनेंशियल सर्विसेज पर सर्विस टैक्स को बढ़ाकर 15% से 18% कर दिया है।

यूलिप पर देना होगा ज्यादा कर: 

जीएसटी के लागू होने के बाद आपको यूलिप पर 18 फीसद के हिसाब से कर देना पड़ रहा है|ये कर पहले 15% था|कर कि वृद्धि का सीधा प्रभाव रिटर्न पर पड़ना आसानी से समझा जा सकता है|

म्युचुअल फंड की लागत बढ़ी:

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से  म्युचुअल फंड हाउसेस की लागत बढ़ गयी है।जीएसटी के अंतर्गत म्युचुअल फंड हाउसेस को 3 फीसद का अतिरिक्त सेवा कर देना होगा|किसके कारण देश भर के म्युचुअल फंड हाउसेस का खर्च अनुपात (एक्सपेंस रेश्यो) भी 3 फीसद तक बढ़ गए हैं।  हालांकि जीएसटी, उन छोटे एमएफ डिस्ट्रीब्यूटरों को लाभान्वित कर सकता है, जिनकी वार्षिक आय 20 लाख रुपए से कम है।

खर्च अनुपात में इजाफा:

डायरेक्ट प्लान के लिए खर्च अनुपात जो 1.8 फीसद था  रेग्युलर प्लान  के लिए 2.3 फीसद था जो कि 15% के सेवा कर के अंतर्गत था|18 % होने  के साथ ही खर्च अनुपात भी बढ़ गया है।

एग्जिट लोड भी बढ़ा:

म्युचुअल फंड के जीएसटी के दायरे में आने के साथ ही एग्जिट लोड भी बढ़ जाएगा|विदित हो  कि म्युचुअल फंड कंपनियां कई स्कीकम से निकलते वक्त् निवेशकों से एग्जिट लोड के रूप में फीस वसूलती हैं। अब इस फीस पर GST का भार बढने से निश्चित तौर पर एग्जिट लोड बढ़ गया है|

उपरोक्त सभी आधारों पर देखा जाए तो gst ने mutual fund को सीधे तौर पर प्रभावित किया है|ये पांच बिंदु दर्शाते हैं कि एक दुसरे से भिन्न होने के बाद भी म्युचुअल फंड जीएसटी के प्रभाव के अंतर्गत आते हैं|