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जीएसटी संग्रह में लगातार तीसरे महीने गिरावट

जीएसटी संग्रह में गिरावट से भारत का राजकोषीय घाटा बढ़ जाएगा

आर्थिक मंदी और रोजगार संकट से जूझ रही भारतीय अर्थव्यस्था के लिए जीएसटी भी बुरी खबर लेकर आयी है|  माल एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह अक्टूबर में गिरकर 95,380 करोड़ रुपए रहा।विगत वर्ष अक्टूबर में संग्रह 1,00,710 करोड़ रुपए था।ये जानकारी सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से प्राप्त हुई है।जीएसटी संग्रह में गिरावट से भारत का राजकोषीय घाटा बढ़ जाएगा|जो निश्चित से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बुरी खबर है|

बता दें कि यह लगातार तीसरा महीना है, जबकि जीएसटी की वसूली 1 लाख करोड़ रुपए से नीचे है।बीते सितंबर में जीएसटी संग्रह 91,916 करोड़ रुपए था।वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अक्टूबर 2019 में कुल जीएसटी संग्रह 95,380 करोड़ रुपए रहा। इसमें केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 17,582 करोड़ रुपए, राज्य जीएएसटी (एसजीएसटी) 23,674 करोड़ रुपए, समन्वित जीएसटी (आईजीएसटी) 46,517 करोड़ रुपए (इसमें 21,446 करोड़ रुपए आयातित माल से प्राप्त हुए) और उपकर का हिस्सा 7,607 करोड़ रुपए (774 करोड़ रुपए आयात पर) रहा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार सितंबर महीने के लिए 30 अक्टूबर तक कुल 73.83 लाख जीएसटीआर 3बी रिटर्न (स्व आकलन वाले रिटर्न का संक्षिप्त विवरण) दाखिल दाखिल किए गए।बीते अक्टूबर में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का  राजस्व  पिछले साल अक्टूबर में राजस्व 100,710 करोड़ के मुकाबले 5.29 फीसदी कम रहा। अक्टूबर में दिवाली होने के बावजूद जीएसटी संग्रह में गिरावट मोदी सरकार की चिंता का सबब बन गयी है।

केंद्र सरकार ने बनायी समिति:

लक्ष्य से कम हो रहे वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह से बढ़ते राजकोषीय घाटा से  चिंतित सरकार ने हाल ही में एक जांच समिति का गठन किया था| इस समिति में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब के राज्य जीएसटी काउंसिल के कमिश्नर और केंद्रीय जीएसटी काउंसिल के संयुक्त सचिव और कार्यकारी उपाध्यक्ष शामिल हैं|इस समिति का काम जीएसटी कलेक्शन को बढ़ाने के लिए उपाय सुझाने, कारोबार के जीएसटी सुलभ बनाने और बेहतर समन्वय के रास्ते सुझाने का है| अन्य राज्यों के जीएसटी कमिश्नर भी यदि  चाहें तो इस समिति के सदस्य बन सकते हैं, इसके लिए वे जीएसटी कौंसिल के सचिवालय को लेटर लिख सकते हैं या वे चाहें तो लेटर लिखकर सुझाव भी दे सकते हैं|लगातार जीएसटी संग्रह लक्ष्य से कम रहने की वजह से वित्त वर्ष (2019-20) में जीएसटी संग्रह उम्मीद से 40,000 करोड़ रुपये कम होने की आशंका है|