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जीडीपी विकास दर 5% से नीचे आने की आशंका:एसबीआई

2019-20 के दौरान जीडीपी बढ़त दर घटकर 6 फीसदी से नीचे आ सकती है

जीएसटी के गिरते कलेक्शन ने भारत के राजकोषीय घाटे को बढ़ा दिया है|टैक्स संग्रह में कमी एवं आर्थिक मंदी को देखते हुए जुलाई से सितंबर की तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में बढ़त की दर 5 फीसदी से नीचे आने की आशंका है|जबकि  वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान जीडीपी बढ़त दर घटकर 6 फीसदी से नीचे आ सकती है|ये चेतावनी देश के सर्वप्रमुख  भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने हालिया जारी   एक रिपोर्ट में दी है|

बता दे इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा था कि इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी हो सकती है|इसके अतिरिक्त विभिन्न रेटिंग एजेंसियां मूडीज और फिच भी ऐसी ही आशंका जता चुकी हैं|काबिलेगौर है कि अप्रैल से जून की तिमाही में भारत की जीडीपी में बढ़त सिर्फ 5.8 फीसदी हुई थी| खपत में कमी, कमजोर निवेश और कई सेक्टर के खराब प्रदर्शन की वजह से जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार और सुस्त पड़ी है| इसके पहले वित्त वर्ष 2012-13 की जनवरी से मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी से नीचे 4.3 फीसदी तक थी|

एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट कहती है कि, ‘वित्त वर्ष 20 की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में ग्रोथ के रफ्तार पकड़ने के बारे में हमें अब कम उम्मीद है|सितंबर में कुल 26 संकेतकों में से सिर्फ 5 संकेतकों में बढ़त देखी जा रही है| इससे यह संकेत मिलता है कि अभी भी इकोनॉमी में मांग में महत्वपूर्ण कमी बनी हुई है और इसे सुधरने में समय लग सकता है| प्रमुख संकेतकों को देखने से अब ऐसा लग रहा है कि दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी से कम होगी|’

हालांकि रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इस साल की दूसरी छमाही में जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार बढ़ सकती है| इसमें कहा गया है कि सरकारी खर्च बढ़ने और कंपनियों की बिक्री बढ़ने की वजह से तीसरी तिमाही से जीडीपी ग्रोथ में थोड़ा सुधार हो सकता है|इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी साल 2019 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया है|साथ ही साथ भारतीय  रिजर्व बैंक ने  इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.9 से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया है|