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टैक्स सेविंग का बेहतर विकल्प -इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS)

टैक्स बचाना हो तो औरों की तुलना में इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम ज़्यादा बेहतर

कई करदाता अपने टैक्स को बचाने के लिए बेहतर विकल्प की तलाश करते हैं, ऐसे में उपलब्ध तमाम विकल्पों की तुलना में Equity linked saving scheme (ELSS) आपका बेहतर विकल्प हो सकता है। सलाहकार की इस राय के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण है।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम चुनने के प्रमुख कारण

  1. ELSS में निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन का फ़ायदा मिलता है। आयकर कानून के अनुसार निवेशक ELSS में 1.5 लाख रूपये तक के निवेश पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।
  2. सेक्शन 80C में उपलब्ध ELSS सबसे कम लॉक इन अवधि का होता है। इसकी लॉक इन अवधी मात्र 3 वर्ष है जो औरों की तुलना में काफी कम है। (सलाह दी जाती है कि आपको 5 साल की अवधी के लिए निवेश करना चाहिए)
  3. ज़्यादातर टैक्स बचत विकल्प सरकार के गारंटी के साथ आते हैं मगर उसमे रिटर्न काफी कम होता है जबकि ELSS में यह रिटर्न दहाई अंको में होने की संभावना ज़्यादा होती है।
  4. ये स्कीम आपके लिए शेयर बाज़ार में निवेश का रास्ता खोलती है। वैसे तो इसमें 1.5 लाख रूपये तक के टैक्स की बचत होती है परन्तु इसमें निवेश की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है।
  5. ELSS से हुए Long Term capital gains (LTCG) पर 10 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। इक्विटी स्कीमों से एक लाख रुपये तक के मुनाफ़े पर टैक्स छूट मिलती है। इसलिए 10 फीसदी टैक्स के बावजूद ELSS अन्य पारंपरिक टैक्स सविंग स्कीमों से बेहतर कर बाद रिटर्न देते हैं।
  6. ज्यादातर टैक्स सेविंग्स निवेश में मैच्योरिटी की तारीख होती है, जिसे उस निश्चित अवधि के बाद रिन्यू किया जा सकता है। ईएलएसएस में इस तरह की कोई फिक्स्ड मैच्योरिटी डेट या अवधि नहीं होती। निवेशक जब तक चाहें ईएलएसएस में निवेश को बनाए रख सकते हैं।