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तम्बाकू और कोयला उत्पादों पे GST फिर बढ़ सकती है

राज्य सरकारों का सुझाव -तम्बाकू और कोयला उत्पादों पे GST बढ़ाई जाये।

Goods & Services Tax (GST) एक बार फिर चर्चा का कारण है। GST जबसे लागू हुई है, पहले ही आम जनता परेशान है, उसपे अब सरकार अपने GST कलेक्शन बढ़ाने के लिए तंबाकू उत्पादों (Tobacco Products) और कोयला (Coal) जैसे आइटम्स पर टैक्स (Tax) बढ़ाने पर विचार कर रही है। ज्ञातव्य हो की आज भी हिन्दस्तान की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा रसोई के लिए ईंधन के रूप में कोयले का ही इस्तेमाल करती है। सूत्रों ने बताया कि जीएसटी रेवेन्यू कलेक्शन और जीएसटी स्ट्रक्चर पर सुझाव देने के लिए सचिवों की बनी कमिटी की पहली बैठक हुई जिसमे टैक्स कलेक्शन के लगातार गिरते हुए ग्राफ़ और उसकी भरपाई पे चर्चा हुई। कई सारे राज्यों ने कहा कि जीएसटी कलेक्शन काफी घट रहा है। ऐसे में उन्हें इस बात का ख़तरा है कि उन्हें जो सेस के जरिए कलेक्शन हो रहा था, उसमें भी काफी कमी हो जाएगी। इसलिए कमिटी का सुझाव है कि कुछ चुनिंदा उत्पादों पर टैक्स बढ़ा कर इसकी भरपाई की जाये। कमिटी ने कोल और तम्बाकू उत्पादों पे टैक्स बढ़ने की पेशकश की है। इसके अलावा इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले आइटम्स में भी फेरबदल का सुझाव कमिटी ने रखा है। कमेटी के सुझावों पर अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में होगा। दरअसल अप्रैल से अगस्त 2019 के बीच जीएसटी की ग्रोथ में महज 1 फीसदी की बढ़त मिली वहीँ जीएसटी कलेक्शन में अगस्त महीने की तुलना में सितंबर में करीब 6 हजार करोड़ से ज्यादा की गिरावट आई है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन की राशि 98,202  करोड़ रुपए थी जो सितंबर महीने में घटकर 91,916 करोड़ रुपए हो गई थी।

आंकलन के मुताबिक जीएसटी सेस कलेक्शन से 8000 करोड़ रुपए का घाटा संभव है। अगले वित्त वर्ष में जीएसटी सेस घाटा 3 – 4 गुना बढ़ सकता है। जीएसटी घाटे की भरपाई के तौर पर केंद्र को 1.06 लाख करोड़ रुपए देने पड़ सकते हैं। केंद्र की तरह रिज़र्व बैंक और पीएसयू के डिवीडेंड जैसे आय के स्रोत राज्य सरकारों के पास नहीं है। केंद्र को भरपाई करनी होगी।  राज्यों की मांग है कि 5 साल  के बजाए 8 साल तक कंपन्सेशन मिले। भरपाई में कमी होने की हालत में राज्यों को योजनाओं में कटौती करनी पड़ेगी।