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ताकि भारत पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था वाला देश बन सके

पीएसयू और बीमा का विलय

पिछले पांच वर्षों में निवेश का माहौल बनाने के लिए सरकार ने कई सुधार किए हैं, ताकि भारत पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर अर्थव्यवस्था वाला देश बन सके।जीडीपी वृद्धि दर को बढ़ाने के लिए सरकार अर्थव्यवस्था में संतुलित स्तर की निश्चित निवेश दर, कम निजी उपभोग दर और निर्यात को बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।ये बातें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहीं|वे लोकसभा में सांसद  एन.के. प्रेम चंद्रन  के आर्थिक मंदी के विषय पर पूछे गये प्रश्न का उत्तर दे रही थी|

जीडीपी गिरने की बात स्वीकार की:

वित्त मंत्री  ने आर्थिक मंदी को लेकर हुए एक सवाल के जवाब में जीडीपी गिरने की बात तो स्वीकार की|किंतु  यह भी कहा कि भारत जी-20 में सबसे तेज दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।वित्तमंत्री ने बताया कि विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में जीएसटी के बाद भारत की रैंकिंग 2018 के 77 के बदले 2019 में 63 हो गई। उन्होंने बताया कि  उन्होंने बताया कि निवेश के लिए माहौल बनाने के लिए हाल ही में कारपोरेट टैक्स की दर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई।

जीएसटी(gst) से जुड़े प्रश्न को G-20 से जोड़ा:

बता दें लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान  सांसद एन.के. प्रेम चंद्रन ने सरकार से पूछा कि क्या सरकार ने आर्थिक मंदी के कारणों, विदेशी व्यापार समझौते या जीएसटी से इसके कनेक्शन की कोई पड़ताल की है? उन्होंने यह भी पूछा था कि मंदी से निपटने के लिए क्या सरकार आर्थिक नीतियों में परिवर्तन करेगी?इस प्रश्न के लिखित जवाब में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, “2014-19 के दौरान औसत जीडीपी वृद्धि 7.5 प्रतिशत थी, जो कि जी-20 देशों में सर्वाधिक है। वर्ष 2019 के वल्र्ड इकोनॉमिक आउटलुक( डब्ल्यूईओ) ने वैश्विक उत्पादन और व्यापार में अच्छी-खासी मंदी का अनुमान लगाया है। फिर भी हाल में जीडीपी में कुछ कमी के बावजूद डब्ल्यूईओ के अनुमान के अनुसार भारत जी-20 देशों में सबसे तेज दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।”

क्या है G-20?

G-20 दरअसल  बीस वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नर्स का समूह है|(जी20,जी -20 और बीस का समूह के रूप में भी जाना जाता है), ये समूह विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रीयों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। जिसका प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय केंद्रीय बैंक द्वारा किया जाता है। समूह के 20 सदस्य हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ,फ्रांस,जर्मनी,भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका। स्पेन एक स्थायी अतिथि है जो, हर वर्ष आमंत्रित होता है।

पीएसयू और बीमा का विलय:

इससे पहले केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन सामान्य बीमा कंपनियों के विलय पर बजट की घोषणा को लेकर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “यह घोषणा बजट के दौरान की गई थी, और इस दिशा में मैं आगे बढ़ रही हूं।”मीडीया की ख़बरों  के अनुसार, विलय होने वाली प्रस्तावित कंपनियां- नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और ओरिएंटल इंश्योरेंस लिमिटेड हैं।वित्त मंत्री ने बताया कि ये कंपनियां अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण आगे बढ़ने में अक्षम हैं, इसलिए इनके विलय का फैसला लिया गया।”कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इन पीएसयू ने सरकार से आर्थिक मदद मांगी थी। उनकी वर्तमान बैलेंस शीट के अनुसार, उन्हें तत्काल पुर्नपूजीकरण की जरूरत है।”हालांकि 2019-20 के बजट में बीमा कंपनियों के लिए वित्तीय मदद का कोई प्रावधान नहीं किया गया था, इसलिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) को इस काम के लिए 12,000 करोड़ रुपये की अनुपूरक वित्तीय सहायता लेनी होगी।