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तेजस के बाद 150 ट्रेनों के निजीकरण का निर्णय

 रेलमंत्री और नीति आयोग ने लिया फैसला

देश की पहली निजी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन तेजस के बाद मोदी सरकार ने देश के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के निजीकरण के प्रयास तेज कर दिए हैं।बीते 6 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन तेजस  हरी झंडी दिखाई थी।तेजस के सफर शुरू होने के साथ ही केंद्र सरकार ने 50 रेलवे स्टेशनों और 150 ट्रेनों का निजीकरण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जानीये तेजस के बारे में:

Tejas Express का संचालन पूरी तरह आईआरसीटीसी (IRCTC) के हाथ में है| इस ट्रेन में एसी चेयरकार और एग्जीक्युटिव चेयरकार दो तरह की बोगियां हैं|ये ट्रेन अभी  दिल्ली-लखनऊ के बीच सप्ताह में 6 दिन चलेगी|नवंबर से अहमदाबाद-मुंबई के बीच भी तेजस चलाने कि योजना पर तेजी से काम चल रहा है| तेजस एक्सप्रेस के एसी चेयर कार में लखनऊ से दिल्ली तक के सफर का किराया है 1,125 रुपये| इसमें बेस फेयर 895 रुपये, 45 रुपये GST और 185 रुपये का कैटरिंग चार्ज शामिल है| एग्जिक्युटिव चेयरकार में सफर के लिए  2,310 रुपये चुकाने होंगे| जिसमें 1,966 रुपये बेस फेयर, 99 रुपये जीएसटी (GST) के साथ ही 245 रुपये कैटरिंग चार्ज शामिल हैं| तेजस के संचालन के लिए आईआरसीटीसी (IRCTC) कर्मचारियों को यात्रियों से सम्मान से पेश आने की ट्रेनिंग दी गई है| आईआरसीटीसी कर्मचारियों को यात्रियों के हर सवाल का जवाब मुस्कान के साथ देने पर जोर दिया गया|तेजस ट्रेन के सफर में यात्रियों को 25 लाख रुपए का नि:शुल्क बीमा भी दिया जाएगा|यात्रा के दौरान लूटपाट या सामान चोरी होने की स्थिति के लिए भी एक लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रावधान है|

 रेलमंत्री और नीति आयोग पहले चरण में 150 ट्रेनों के निजीकरण पर सहमत:

रेलवे जल्द ही 150 ट्रेनें और 50 स्टेशन निजी हाथों में सौंप देगा। रेलमंत्री और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के बीच हुई कई दौर की बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रोजेक्ट पर अमल के लिए सचिव स्तर के एम्पावर्ड ग्रुप को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने रेलवे बोर्ड चेयरमैन विनोद कुमार यादव को लिखे पत्र में कहा कि  ‘जैसा कि आप पहले से जानते हैं कि रेल मंत्रालय ने पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए निजी ट्रेन ऑपरेटरों का लाने का फैसला किया है और पहले चरण में 150 ट्रेनों को इसके तहत लेने का विचार कर रहा है।’
कांत ने अपने पत्र में रेलवे बोर्ड चेयरमैन को यह लिखा कहा है कि रेलवे को देश के 400 स्टेशनों को विश्व स्तरीय सुविधाओं वाला बनाना था, लेकिन कई साल से चल रहे इस प्रोजेक्ट में कुछ खास उपलब्धि नहीं मिली। महज कुछ स्टेशन ईपीसी मोड पर हाथ में लिए गए। इस मामले को प्राथमिकता देने की जरूरत महसूस की गई। कांत ने कहा कि इन प्रोजेक्ट के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सदस्यों, इंजीनियरिंग रेलवे बोर्ड व सदस्य और ट्रैफिक रेलवे बोर्ड को एक समूह में शामिल होना होगा।इसके लिए छह एयरपोर्ट के निजीकरण के अनुभव के आधार पर एम्पावर्ड ग्रुप काम करेगा।

बता दें कि ट्रेन संचालन का जिम्मा निजी ऑपरेटर्स को दिया जाना है|इसके तहत पहले चरण में 150 ट्रेनें दी जाएंगी। ये ट्रेनें रेलवे की ओर से देशभर में चलाई जा रही ट्रेनों के लिए आदर्श बनेंगी। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए बनाए गए एम्पावर्ड ग्रुप में नीति आयोग के सीईओ, रेलवे बोर्ड चेयरमैन, इकॉनोमिक अफेयर डिपार्टमेंट के सचिव, मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अरबन अफेयर के सचिव के साथ रेलवे बोर्ड के सदस्य इंजीनियरिंग और रेलवे बोर्ड सदस्य ट्रैफिक को भी शामिल किया गया है|

 रेल कर्मचारी रेलवे निजीकरण और तेजस के विरोध में:

देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस को हरी झंडी दिखाने के साथ देशभर में रेलवे कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 150 ट्रेन और 50 स्टेशन को लेकर हुए फैसले से भीर विभिन्न रेल कर्मचारी संगठन नाखुश हैं| ऑल इंडिया रेलवेमैन्स फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि रेलवे का सबकुछ निजी हाथों में जाने वाला है, यह तय है। ऐसे में हमारे पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।